रायबरेली में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बेअसर, रंगे हाथ पकड़े गए कर्मचारी फिर से तैनात

रायबरेली: जिले में कर्मचारियों का भष्ट्राचार दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. इसमें एंटी करप्शन की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों में फरियादियों से काम के बदले घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गए कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया. लेकिन जेल से जमानत पर रिहा होकर वापस आए कि जिम्मेदारों के द्वारा उनकी बहाली करते हुए उन्हीं पटलों पर दोबारा तैनाती कर दी गई.

इससे दोबारा उक्त कर्मचारियों की मनमानी वहीं फिर से पुराने ढर्रे पर चलने लगी. इसमें जिला प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई. एंटी करप्शन टीम की ओर से जिले में अलग-अलग तहसील क्षेत्रों में छापेमारी की गई. इसमें सबसे राजस्व विभाग के कर्मचारी ही फरियादियों से घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गए. बीती 29 मई वर्ष 2025 में एंटी करप्शन टीम ने ऊंचाहार तहसील में छापेमारी की तो उपजिलाधिकारी कार्यालय में तैनात कर्मचारी को रंगे हाथ घूस लेते दबोचा गया.

उक्त टीम के द्वारा घूस लेते पकड़े गए कर्मचारी के खिलाफ सम्बन्धित थाने में भष्ट्राचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करते हुए उसे जेल भेजा गया है. महज कुछ माह बाद जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद जिला प्रशासन की ओर से उक्त कर्मचारी को दोबारा उसी पटल पर फिर से तैनाती दे दी गई. प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से उक्त कर्मचारी के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई. यहां तक की उक्त कर्मचारी की पटल तक नहीं बदली गई.

वहीं वर्ष 2025 में ही बीती 31 दिसंबर को लालगंज तहसील में तैनात कानून-गो गंभीर सिंह को जमीन की पैमाइशन किए जाने के मामले में फरियादी से पांच हजार रुपए घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा गया है. गुरूबख्शगंज थाने में उक्त कानून-गो के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए उसे जेल भेजा गया है. वहीं इससे पहले वर्ष 2023 में नौ सितंबर को सदर तहसील में तैनात एक लेखपाल को एंटी करप्शन की टीम ने पकड़ा था. मामले में जेल भेजे जाने के बाद जमानत पर रिहा होकर आए उक्त राजस्व कर्मी को दोबारा उसी तहसील में तैनाती कर दी गई. अब सवाल उठता है कि एंटी करप्शन टीम के द्वारा ताबड़तोड़ भष्ट्राचार में संलिप्त कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई.

मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस के प्रयास पर फिरा पानी

प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी विभागों में जीरो टॉलरेंस के प्रयास जिले में पूरी तरह से फेल साबित हो रहे है. एक साल के अंदर भष्ट्रचार निवारण टीम की ओर से पकड़े गए मामलों के बाद सरकारी पटलों पर जमे कर्मचारियों की पोल खुल गई है. वहीं इससे विभाग की भी जमकर किरकिरी हो रही है.

क्या बोली डीएम?

डीएम हर्षिता माथुर ने एंटी करप्शन टीम के द्वारा की गई कार्रवाई के मामलों की जांच भी उक्त टीम के द्वारा की जा रही है. दोष सिद्व होने के बाद विभागीय कार्रवाई की जाएगी.