दमोह के बड़ी देवी मंदिर में सुबह 3 बजे से भक्तों की भीड़, नवरात्र के पहले दिन उमड़ा आस्था का सैलाब


दमोह में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन बड़ी देवी मंदिर में सुबह 3 बजे से ही भक्तों की भीड़ जुटने लगी। दरअसल मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं ने माता रानी के दर्शन किए और जल अर्पित किया। मंदिर में महिलाओं की संख्या भी काफी रही। नवरात्र के नौ दिनों तक यहां हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के खास इंतजाम किए हैं। मंदिर आने वाली महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
दरअसल दमोह के बड़ी देवी मंदिर को शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। नवरात्र के पहले दिन यहां सुबह से ही पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। भक्त जल लेकर मंदिर पहुंचे और बड़ी देवी जी की प्रतिमा पर जल चढ़ाया। मंगला आरती के बाद जैसे ही कपाट खुले, श्रद्धालु दर्शन के लिए आगे बढ़ने लगे। मंदिर परिसर में दिन की शुरुआत से ही भक्तिमय माहौल नजर आया।
बड़ी देवी मंदिर में जल चढ़ाने की खास मान्यता
बता दें कि बड़ी देवी मंदिर में माता की प्रतिमा पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व माना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु अपने साथ जल लेकर पहुंचते हैं और प्रतिमा पर अर्पित करते हैं। मंदिर की खास बात यह है कि भक्तों को बिना भेदभाव के प्रमुख प्रतिमा पर जल चढ़ाने का मौका मिलता है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग यहां पूजा करने आते हैं।
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि बड़ी देवी जी को जल अर्पित करने से जीवन की परेशानियां और बाधाएं दूर होती हैं। लोग माता रानी से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। कई भक्त मंदिर से जुड़ी अपनी आस्था और अनुभव भी साझा करते हैं। उनका कहना है कि उन्हें यहां पूजा करने से मन को शांति मिलती है और मुश्किल समय में भरोसा मिलता है।
नवरात्र के पहले दिन सुबह से मंदिर पहुंचे श्रद्धालु
दरअसल शारदीय नवरात्र के पहले दिन बड़ी देवी मंदिर में मंगला आरती के बाद दर्शन शुरू हुए। सुबह 3 बजे से ही भक्त मंदिर पहुंचने लगे थे। कपाट खुलते ही लोगों ने माता के दर्शन किए और जल अर्पित किया। मंदिर परिसर में महिला श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में नजर आईं। भक्तों के लिए यह दिन नवरात्र की शुरुआत के साथ माता रानी की पूजा करने का खास मौका रहा। श्रद्धालु नवरात्र के पहले दिन माता के दर्शन और पूजा करने पहुंचे। मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए जल चढ़ाने की परंपरा खास आकर्षण रहती है। इसी मान्यता के चलते लोग सुबह जल्दी मंदिर पहुंचकर पूजा करना पसंद करते हैं।











