सिंहस्थ के विकास कार्यों का ओंकारेश्वर में विरोध, 19 अक्टूबर से 2 दिन बंद का ऐलान

उज्जैन की तरह ओंकारेश्वर में भी सिंहस्थ 2028 को लेकर कई तरह के कार्य चल रहे हैं। इसमें अतिक्रमण हटाने से लेकर नए निर्माण सभी शामिल हैं। हालांकि प्रस्तावित विकास योजनाओं का असर लोगों के मकान और दुकानों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में अब लोगों ने विकास कार्यों का विरोध करना शुरू कर दिया है।

मकान और दुकान प्रस्तावित कार्यों की जद में आने से नाराज स्थानीय लोगों ने एक साथ मिलकर 19 अक्टूबर से ओंकारेश्वर बंद का ऐलान किया है। शुक्रवार रात एक सर्वदलीय बैठक रखी गई। जिसमें सर्वसम्मति से दो दिन के बंद का ऐलान किया गया। ये भी कहा गया है कि अगर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो ये बंद अनिश्चितकालीन भी हो सकता है।

वैकल्पिक व्यवस्था की है मांग

लोगों का कहना है कि रजिस्टर्ड संपत्तियों के साथ शासकीय और पट्टे वाले मकानों पर लंबे समय से निवास या व्यवसाय कर रहे लोगों को पुनर्वास का लाभ मिलना चाहिए। विस्थापन से पहले वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की जा रही है। नागरिकों का कहना है कि वह विकास कार्यों के विरोध में नहीं है लेकिन जो लोग वर्षों से यहां रह रहे हैं और दुकानदारी कर रहे हैं उनकी आजीविका प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

मुआवजे की मांग

इस मामले में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष जयप्रकाश पुरोहित का कहना है कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर प्रभावित मकान, दुकान और दूसरी संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके लिए राजस्व निरीक्षक, पटवारी और संबंधित अधिकारियों की टीम से निष्पक्ष तरीके से सीमांकन कर मूल्यांकनकर्ता से आंकलन कराने की बात की गई है।

इसी के साथ जिन लोगों के मकान प्रभावित हो रहे हैं। उन्हें ओंकारेश्वर वेलकम गेट के पास टंट्या मामा की प्रतिमा से गणेश नगर तक भूखंड स्वामित्व अधिकार के साथ देने की मांग की गई है। वहीं जिनकी दुकान प्रभावित हो रही है। उन्हें पुराने व्यवसाय स्थल के आसपास वैकल्पिक दुकान और स्थाई दुकानें बनने तक व्यवस्था उपलब्ध कराने को कहा गया है।

संत समाज और कांग्रेस का मिला साथ

स्थानीय लोगों के इस आंदोलन को संत समाज का भी साथ मिल रहा है। महंत मंगलदास त्यागी का कहना है कि अगर लोग अपनी मांगों को लेकर नगर बंद करते हैं तो संत समाज उनके समर्थन में खड़ा रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरान संत समाज द्वारा संचालक सार्वजनिक भंडारे में बंद रखे जाएंगे।

वहीं नेता प्रतिपक्ष राजेश यादव ने कहा कि कांग्रेस के सभी पार्षद रहवासियों की लड़ाई उनके साथ लड़ेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो सामूहिक रूप से इस्तीफा देने से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि अगर जनता ही नहीं रहेगी तो हमें जनप्रतिनिधि कौन बनाएगा।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
close