जर्जर सड़क और बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों का प्रदर्शन, SDM को सौंपा ज्ञापन


सीहोर-श्यामपुर मार्ग की बदहाल सड़क और बार-बार हो रही अघोषित बिजली कटौती से तंग आकर आखिरकार ग्रामीणों और किसानों के सब्र का बांध टूट गया। परेशान लोगों ने एकजुट होकर अनुविभागीय अधिकारी सीहोर के दफ्तर पहुंचकर अपनी समस्याओं का एक ज्ञापन सौंपा है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से वे इन समस्याओं को झेल रहे हैं लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
दरअसल, ज्ञापन सौंपने पहुंचे ग्रामीणों और किसानों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि प्रशासन के पास इन दोनों बड़ी समस्याओं का समाधान करने के लिए केवल 10 दिनों का समय है। अगर तय समय सीमा के भीतर सड़क की मरम्मत और बिजली सप्लाई में सुधार नहीं किया गया तो चांदबड़ में बड़ा चक्का जाम और उग्र आंदोलन किया जाएगा।
बड़े-बड़े गड्ढों से जर्जर हुई सड़क
ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में सीहोर-श्यामपुर रोड की खस्ताहाल स्थिति का पूरा ब्योरा दिया है। उनका कहना है कि पूरी सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं, जिसके कारण अब यहां से पैदल निकलना भी बेहद मुश्किल हो गया है। दरसल, सड़क की इतनी खराब हालत होने की वजह से आए दिन दोपहिया और चार पहिया वाहन हादसे का शिकार हो रहे हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों की जान हमेशा जोखिम में बनी रहती है।
इसके अलावा सड़क से उड़ने वाली धूल और हिचकोलों के कारण रोज सफर करने वाले आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दरसल, कई बार शिकायतें करने के बावजूद पीडब्ल्यूडी विभाग इस सड़क की मरम्मत की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की इस अनदेखी की वजह से हर दिन कोई न कोई दुर्घटना का शिकार हो रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रबी सीजन में सिंचाई के समय कट रही बिजली
सड़क के साथ-साथ ग्रामीणों ने बिजली विभाग की मनमानी और अघोषित कटौती का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया। किसानों का कहना है कि इस समय रबी का सीजन चल रहा है और फसलों को पानी देने के लिए लगातार बिजली की सख्त जरूरत है। बिजली कंपनी बिना कोई सूचना दिए घंटों बिजली बंद कर देती है, जिससे खेतों में सिंचाई का काम पूरी तरह से ठप्प हो जाता है और फसलों के सूखने का डर बना रहता है।
बिजली कटौती की इस समस्या से केवल किसान ही नहीं बल्कि आम ग्रामीण भी रात भर परेशान रहते हैं। रात के समय अचानक बिजली चले जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और अंधेरे के कारण लोगों को डर के साए में गुजारना पड़ता है। किसानों ने मांग की है कि सिंचाई के लिए बिना रुकावट 24 घंटे बिजली दी जाए वरना मजबूर होकर उन्हें उग्र रास्ता अपनाना पड़ेगा।











