4 पटवारियों की बर्खास्तगी से भड़का आक्रोश, रतलाम कलेक्ट्रेट में साथियों ने किया प्रदर्शन


रतलाम जिले में स्वामित्व योजना में निष्पादक की भूमिका से हटाने और अपने 4 साथियों की बर्खास्तगी के विरोध में पटवारियों ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को जिलेभर के पटवारियों ने काम बंद कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। कलेक्ट्रेट परिसर में जमीन पर बैठकर पटवारियों ने करीब 5 घंटे तक जोरदार विरोध जताया और प्रशासनिक रवैये के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला पटवारी भी शामिल हुईं।
62 पटवारियों को नोटिस
प्रशासनिक कार्रवाई का दायरा केवल 4 बर्खास्तगी तक ही सीमित नहीं रहा। कलेक्टर ने जिले के 62 परिवीक्षाधीन पटवारियों को कारण बताओ नोटिस थमाए हैं, जबकि 462 पटवारियों को चेतावनी पत्र दिए गए हैं। इसके अलावा स्वामित्व योजना और फार्मर रजिस्ट्री में लापरवाही बरतने के आरोप में 12 अन्य पटवारियों को दीर्घ शास्ति के आरोप-पत्र जारी किए गए हैं। इन सभी से विभागीय जांच प्रक्रिया के तहत लिखित जवाब मांगा गया है।
15 दिन की प्रोग्रेस पर कार्रवाई को बताया तानाशाही
सेवा से हटाए गए परिवीक्षाधीन पटवारी शैलेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि उन्हें स्वामित्व रजिस्ट्री में महज 15 दिनों की जीरो प्रोग्रेस के आधार पर हटा दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि उनकी ढाई साल की सेवा का कोई आकलन नहीं किया गया। उनका कहना है कि स्वामित्व योजना में कई तकनीकी खामियां हैं, जिन्हें दूर करने की मांग संघ काफी समय से कर रहा था, लेकिन सुधार की जगह एकतरफा कार्रवाई कर दी गई।
स्वामित्व योजना में निष्पादक बनने से इनकार
पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष गोपाल रावत ने कहा कि स्वामित्व योजना में निष्पादक के रूप में काम करना पटवारियों का मूल कर्तव्य नहीं है। उन्होंने कलेक्टर के इस फैसले को तानाशाही करार देते हुए कहा कि जब तक बर्खास्त साथियों की बिना शर्त बहाली नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा। संघ का साफ कहना है कि अब जिले का कोई भी पटवारी स्वामित्व योजना के तहत निष्पादक की जिम्मेदारी नहीं संभालेगा।
मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान
धरने के दौरान कलेक्ट्रेट भवन में बैठकें चलती रहीं, लेकिन पटवारियों ने न तो किसी अधिकारी को ज्ञापन सौंपा और न ही कलेक्टर से मुलाकात की। शाम 6 बजे तक कलेक्ट्रेट परिसर में धरना जारी रहा। पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे प्रांतीय संगठन के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। यदि शासन और प्रशासन ने उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल जाएगा।











