इंदौर: अमृत 2.0 परियोजना की सुस्ती से अगले 3 साल तक दूषित पानी पीने का खतरा, शहरवासियों में चिंता

इंदौर — शहर में जल आपूर्ति सुधारने के लिए चल रही अमृत 2.0 परियोजना की धीमी प्रगति के कारण निवासियों को अगले दो-तीन वर्षों तक दूषित पानी पीने पर मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।
परियोजना में सौ से अधिक नई पेयजल टंकियों का निर्माण, करीब 550 किमी पुरानी पाइप लाइनों को बदलना और 1400 किमी नई नर्मदा पाइप लाइन बिछाने का काम चार पैकेज में विभाजित है, लेकिन अब तक सिर्फ एक पैकेज के लिए एजेंसी तय हो सकी है, जिससे कार्य में देरी हो रही है।
शहर की पुरानी पाइप लाइनों में टूट-फूट की आशंका अधिक है और कई बस्तियों में संकीर्ण सड़कें होने के कारण काम करना चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एजेंसियों के चयन और काम के आरंभ में और विलंब होने पर सिंहस्थ 2028 से पहले परियोजना पूरी करना मुश्किल हो सकता है, जिससे फिलहाल निवासियों को दूषित पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
यह चिंता ऐसे समय में बढ़ी है जब शहर के कुछ इलाकों में पहले से ही दूषित पानी के कारण बीमारियों और मौतों की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे स्वच्छ पानी सुनिश्चित करने की आवश्यकता और बढ़ गई है।











