छत्तीसगढ़ में सियासी ‘होली’: अजय चंद्राकर को ‘मंत्रिमंडल’ का गुलाल मिलेगा या ‘दिल्ली’ की पिचकारी?

कुरुद: छत्तीसगढ़ की सियासत में इस बार होली के रंग वाकई कुछ ज्यादा ही गाढ़े नज़र आ रहे हैं. सत्ता के गलियारों में अभी गुलाल उड़ा नहीं है, पर चर्चा का रंग अभी से गहरा गया है. खबरों की सियासी ‘पिचकारी’ सीधे अजय चंद्राकर के दरवाजे पर जाकर रुकी है. कयासों का बाजार इतना गर्म है कि हर कोई यही पूछ रहा है- क्या भाजपा के इस ‘फायर ब्रांड’ नेता का अब ‘इमेज मेकओवर’ होने वाला है? यानि कि उसका साय सरकार के कैबिनेट 2.0 में जगह मिलने वाली है.

‘अग्नि’ से ‘अबीर’ तक का सफर

विपक्ष के साथ -साथ​ अपनी ही सरकार की क्लास लगाने में माहिर रहे अजय चंद्राकर इन दिनों थोड़े शांत नजर आ रहे है, जिससे सियासत के गलियारों में सस्पेंस का गुब्बारा फूल गया है. पार्टी के हाईकमान ने उन्हें साफ संकेत दे दिया है कि भाई साहब अपनों पर ही रंग मत डालिए, वरना सरकार का रंग फीका पड़ जाएगा. यही वजह है कि जो नेता पहले सवालों की बरसात कर देते थे, वे अब ‘संयम का अबीर’ लगाए चुपचाप बैठे हैं. सूत्रों की मानें तो सरकार को कार्यकर्ताओं और जनता के बीच अपनी साख का जो ‘नया रूप’ देना है, उसके लिए चंद्राकर की ताजपोशी का प्लान फाइनल है.

दिल्ली का ‘दांव’ या रायपुर का ‘दांव-पेंच’?

​लेकिन सस्पेंस तब और बढ़ जाता है जब बात दिल्ली तक पहुँचती है. चर्चा है कि भाजपा को संसद में विपक्ष की घेराबंदी तोड़ने के लिए चंद्राकर जैसे आक्रामक रणनीतिकार,  अनुभवी और तार्किक वक्ता की जरूरत है. क्या उन्हें राज्यसभा भेजकर दिल्ली की राजनीति में बड़ा धमाका किया जाएगा? अगर ऐसा हुआ, तो कुरुद की सीट खाली होना तय है और वहां शुरू होगा असली ‘उपचुनाव का दंगल’.

कुरुद में दावेदारों की ‘होली’

​अगर सीट खाली हुई, तो कुरुद में टिकट की लाइन किसी मेले से कम नहीं होगी. वहां दावेदारों की कतार तैयार खड़ी है-

  • निरंजन सिन्हा: जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष, जिनकी संगठन में पकड़ और फील्डिंग एकदम पक्की है.
  • ज्योति भानू चंद्राकर: नगरपालिका कुरुद की अध्यक्ष, युवा महिला नेत्री जो विकास का नया रंग भरने को तैयार हैं.
  • गीतेश्वरी हेमन्त साहू: जनपद पंचायत अध्यक्ष,  जिनकी इन दिनों धुंआधार चल रही क्षेत्रीय दौरा चुनावी समीकरणों को साध सकती है.
  • मालक राम साहू: प्रदेश साहू समाज के पूर्व उपाध्यक्ष और सादगी की मूरत, जिनकी छवि काफी मजबूत है.
कांग्रेस से लेखराम की ‘काउंटर पिचकारी’

​इधर कांग्रेस भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है. अजय चंद्राकर के ही इलाके से पूर्व विधायक लेखराम साहू ने राज्यसभा की दौड़ में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. अगर कांग्रेस ने लेखराम का पत्ता खेला, तो कुरुद का कद इतना बढ़ जाएगा कि यहाँ का एक नेता राज्य में मंत्री बनकर ‘पावर’ दिखाएगा, तो दूसरा दिल्ली में बैठकर छत्तीसगढ़ की पैरवी करेगा.

​ इस बार की होली  के बाद छत्तीसगढ़ में ‘सियासी खेला’ होने के पूरे आसार हैं. अब देखना यह है कि भाजपा अपनी सरकार को सजाने के लिए अजय चंद्राकर को रायपुर में रोकती है या फिर उन्हें दिल्ली भेजकर वहां का रंग बदलती है? सियासी पंडितों का तो बस इतना ही कहना है- पिक्चर अभी बाकी है, और असली रंग होली के बाद ही पता चलेगा!’

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