प्लास्टिक कचरे से बन रहीं सड़कें, यूपी के गांव बन रहे विकास का मॉडल

उत्तर प्रदेश के गांव अब स्वच्छता और नवाचार के माध्यम से नई पहचान बना रहे हैं। प्रदेश में प्लास्टिक कचरे का उपयोग कर सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास को भी गति मिल रही है। राजधानी लखनऊ समेत रामपुर, अमेठी, ललितपुर और एटा में अब तक 75 किलोमीटर लंबी सड़कें तैयार की जा चुकी हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन को लेकर वेस्ट टू वेल्थ मॉडल पर काम किया जा रहा है। इसके तहत घर-घर से कूड़ा संग्रहण कर वर्मी खाद का उत्पादन किया जा रहा है। इस पहल से अब तक करोड़ों रुपये की आय सृजित हो चुकी है, जिससे पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

पंचायती राज विभाग द्वारा स्वच्छ गांव महाभियान के अंतर्गत कचरे को संसाधन में बदला जा रहा है। प्लास्टिक अपशिष्ट से सड़क निर्माण, जैविक कचरे से खाद उत्पादन और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन जैसे प्रयोग किए जा रहे हैं। इससे गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में प्लास्टिक वेस्ट के बेहतर उपयोग से न केवल पर्यावरण सुरक्षित हो रहा है, बल्कि पंचायतों की आय में भी वृद्धि हो रही है। इस मॉडल को भविष्य में प्रदेश के सभी गांवों में लागू करने की योजना है।

सरकार का लक्ष्य है कि स्वच्छता, तकनीक और नवाचार के माध्यम से गांवों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए, ताकि ग्रामीण विकास को नई दिशा मिल सके और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जा सके।