RSS के विजयादशमी उत्सव में शस्त्र पूजन के बाद बोले मोहन भागवत, कहा – ‘OTT पर नियम जरूरी’ AI से बन रहे गलत वीडियो पर भी जताई चिंता


नागपुर में RSS के विजयादशमी उत्सव के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने OTT प्लेटफॉर्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), विकास और सामाजिक एकता पर बात की। दरअसल उन्होंने कहा कि तकनीक को रोका नहीं जा सकता है लेकिन उसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना जरूरी है। उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म पर नियमों की जरूरत और AI से गलत वीडियो बनाए जाने की चिंता भी जताई। वहीं इस कार्यक्रम में कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां शामिल हुईं। जानकारी दे दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस साल अपनी स्थापना के 101वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है।
दरअसल संघ मुख्यालय में कार्यक्रम की शुरुआत शस्त्र पूजन से हुई। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अपनी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ के साथ पहुंचे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। वहीं इजराइल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच को भी आमंत्रित किया गया था।
मोहन भागवत ने OTT और AI के इस्तेमाल पर रखी बात
वहीं मोहन भागवत ने तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सही और गलत की समझ को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि तकनीक अपने आप में साधन है लेकिन उसका नतीजा इस बात पर निर्भर करता है कि उसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है। AI जैसी नई तकनीकें आती रहेंगी इसलिए लोगों को उनका जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना सीखना होगा। वहीं OTT प्लेटफॉर्म पर नियमों की जरूरत और AI से गलत वीडियो बनाए जाने का मुद्दा भी उनके संबोधन में शामिल रहा। भागवत ने कहा कि पहले लोगों को अच्छा-बुरा व्यवहार परिवार, पड़ोस, किताबों और समाज से सीखने को मिलता था लेकिन यह तरीका धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि शराब के नुकसान समझाने के लिए एक गांव में अफसरों ने शराब में कीड़े डालकर दिखाए। एक व्यक्ति ने इससे यह नतीजा निकाला कि शराब पीने से पेट के कीड़े भी मर जाएंगे। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने समझाया कि सही बात बताने के साथ यह भी जरूरी है कि लोग उसका सही मतलब समझें।
मोहन भागवत बोले – विकास में इकोनॉमी के साथ एथिक्स भी जरूरी
दरअसल संघ प्रमुख ने विकास के तरीके पर बात करते हुए कहा कि ऐसा विकास होना चाहिए जिसमें सभी को साथ लेकर चला जाए। उन्होंने नेपाल में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हिमालयी इलाकों में विकास के प्रयासों के बीच प्रकृति की स्थिरता का ध्यान रखना जरूरी है। तकनीक और ज्ञान को आगे बढ़ाना जरूरी है लेकिन इसके साथ पर्यावरण और नैतिकता को भी महत्व देना होगा। मोहन भागवत ने कहा कि केवल आर्थिक तरक्की काफी नहीं है। विकास ऐसा नहीं होना चाहिए कि उसे हासिल करने की प्रक्रिया में लोगों की जान पर खतरा आ जाए। उनके मुताबिक नई तकनीकों के फायदे हैं और उन्हें रोका नहीं जा सकता लेकिन उनका इस्तेमाल समझदारी से होना चाहिए। उन्होंने नई पीढ़ी को इस जिम्मेदारी के लिए तैयार करने की जरूरत भी बताई। भागवत ने कहा कि भारत को दुनिया के सामने एक नई राह रखने के लिए युवाओं को तैयार करना होगा।
दरअसल मोहन भागवत ने कहा कि भारत में भाषा, पूजा-पद्धति, पंथ और रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं लेकिन लोगों के बीच अपनापन बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी के पूर्वज एक हैं और किसी की छोटी पहचान मिटाए बिना सबको साथ लेकर चलने की क्षमता जरूरी है। उनके मुताबिक विविधता का सम्मान करने के साथ समय के अनुसार बदलाव अपनाना भी जरूरी है।











