दीया तले अंधेरा! ग्वालियर में बैठे आबकारी अधिकारी, डबरा में खुलेआम बिक रही कच्ची शराब

‘दीया तले अंधेरा’ की कहावत अगर किसी विभाग पर पूरी तरह सटीक बैठती है, तो वह आबकारी विभाग है। ग्वालियर जिला मुख्यालय में बैठे अधिकारी जहां एक ओर अवैध और जहरीली शराब की रोकथाम के लिए रणनीति बनाते हैं, वहीं इसी जिले की डबरा तहसील में एक-दो नहीं, बल्कि कई जगहों पर कच्ची शराब का कारोबार फलता-फूलता नजर आ रहा है। सवाल यह है कि जब अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाना विभाग की जिम्मेदारी है, तो डबरा में यह कारोबार आखिर कैसे चल रहा है?

मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अलग-अलग मंचों से अधिकारियों को अवैध और जहरीली शराब की रोकथाम के निर्देश देते रहे हैं। इसके बावजूद डबरा से सामने आए वीडियो विभाग की कार्रवाई और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। क्या जिम्मेदार अधिकारियों तक इस कारोबार की जानकारी नहीं पहुंच रही या फिर जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही?

सागर और देवास की घटनाओं के बाद भी नहीं चेता विभाग?

सागर और देवास में हाल ही में नकली और अवैध शराब से हुई मौतों ने एक बार फिर इस कारोबार के खतरनाक परिणाम सामने रखे हैं। ऐसे मामलों में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि यदि समय रहते अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाई जाती, तो क्या इन जिंदगियों को बचाया जा सकता था?

इन घटनाओं के बावजूद डबरा में कच्ची शराब की बिक्री के सामने आए वीडियो चिंता बढ़ाने वाले हैं। ये वीडियो सवाल उठाते हैं कि आखिर आबकारी विभाग अवैध शराब की रोकथाम को लेकर कितना गंभीर है और मुख्यमंत्री के निर्देशों पर जमीनी स्तर पर कितना अमल हो रहा है।

नगर पालिका क्षेत्र में भी कच्ची शराब की बिक्री!

डबरा से सामने आए वीडियो में अलग-अलग स्थानों पर कथित तौर पर कच्ची शराब बेची जाती दिखाई दे रही है। इनमें लक्ष्मी कॉलोनी, कठौ की पुलिया और हरिपुर जैसे इलाके शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से ज्यादातर स्थान नगर पालिका क्षेत्र के भीतर आते हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब शहरी क्षेत्र में ही कच्ची शराब की बिक्री की शिकायतें और वीडियो सामने आ रहे हैं, तो विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है? क्या इन स्थानों पर नियमित जांच और कार्रवाई नहीं होती?

ADEO से लेकर आबकारी आयुक्त तक, जवाब कौन देगा?

इस पूरे मामले में ADEO अमीन खान, ADEO प्रवीण उपाध्याय, सर्कल इंस्पेक्टर और उनके आबकारी अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर इन अधिकारियों की जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में कच्ची शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही है?

इससे भी बड़ा सवाल आबकारी आयुक्त की भूमिका को लेकर है। डबरा में सामने आए इन वीडियो और अवैध शराब की बिक्री के आरोपों पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी क्या कार्रवाई करेंगे?

अवैध और कच्ची शराब का कारोबार केवल राजस्व या नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं है, बल्कि इससे लोगों की जान को भी खतरा हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि सामने आए वीडियो की जांच हो, संबंधित स्थानों पर कार्रवाई की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि अब तक इस कारोबार पर रोक क्यों नहीं लग सकी।

 

 

 

 

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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