6 लाख से ज्यादा विदेशी मरीज, WHO की मुहर और PM का विजन… भारत कैसे बना वेलनेस सुपरपावर?

दुनिया भर के मरीज अब इलाज के लिए सिर्फ अस्पताल नहीं, भरोसेमंद हेल्थ डेस्टिनेशन तलाश रहे हैं. इसी दौड़ में भारत तेजी से इलाज और वेलनेस दोनों का वैश्विक केंद्र बनकर उभर रहा है. अत्याधुनिक चिकित्सा, अनुभवी डॉक्टरों और आयुर्वेद-योग जैसी पारंपरिक प्रणालियों के मेल ने भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर दिया है, जहां इलाज सिर्फ बीमारी का नहीं, पूरी सेहत का समाधान माना जा रहा है.
ऑपरेशन से लेकर वेलनेस तक, एक ही इकोसिस्टम
भारत में जटिल सर्जरी, अंग प्रत्यारोपण और कैंसर उपचार जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं. इसके साथ-साथ आयुर्वेद, योग, नेचुरोपैथी और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक प्रणालियां रोकथाम, रिकवरी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर जोर देती हैं. यही इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर मॉडल भारत को अन्य मेडिकल टूरिज्म गंतव्यों से अलग बनाता है.
प्रधानमंत्री का विजन: इलाज से आगे, समग्र स्वास्थ्य
One Earth One Health Advantage Healthcare India 2023 कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेडिकल वैल्यू ट्रैवल को वैश्विक स्वास्थ्य के लिए अहम बताते हुए कहा था कि भारत सदियों से समग्र और निवारक स्वास्थ्य की परंपरा का वाहक रहा है. उन्होंने योग और ध्यान को प्राचीन भारत की आधुनिक दुनिया को देन बताया, जबकि आयुर्वेद को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की संपूर्ण प्रणाली के रूप में रेखांकित किया. प्रधानमंत्री के अनुसार, दुनिया आज तनाव और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से जूझ रही है और भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों में इनके समाधान मौजूद हैं.
Ayush Quality Mark: भरोसे की अंतरराष्ट्रीय मुहर
भारत की मेडिकल वैल्यू ट्रैवल रणनीति को मजबूती देते हुए 19 दिसंबर 2025 को Ayush Quality Mark लॉन्च किया गया. यह पहल आयुष उत्पादों और सेवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरेखित गुणवत्ता आश्वासन ढांचा प्रदान करती है, जिससे विदेशी मरीजों के बीच भरोसा और पारदर्शिता बढ़ेगी. यह लॉन्च World Health Organization के दूसरे वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के दौरान हुआ.
सरकार का फोकस: भरोसा, गुणवत्ता और नतीजे
आयुष मंत्रालय के अनुसार, मेडिकल वैल्यू ट्रैवल केवल सस्ते इलाज तक सीमित नहीं है. भारत की असली ताकत भरोसे, गुणवत्ता और इलाज के नतीजों में है, जहां आयुष प्रणालियां आधुनिक चिकित्सा की पूरक बनकर वैश्विक मांग को पूरा कर रही हैं.
आंकड़े बोलते हैं: भारत की ओर बढ़ता भरोसा
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2020 में भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय मरीजों की संख्या 1.82 लाख थी, जो 2024 में बढ़कर 6.44 लाख तक पहुंच गई. इस वृद्धि में योग, आयुर्वेद और वेलनेस आधारित उपचारों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है.
Ayush Visa और इंश्योरेंस कवरेज से आसान सफर
विदेशी मरीजों की सुविधा के लिए 27 जुलाई 2023 को Ayush Visa शुरू किया गया. यह वीजा आयुष प्रणालियों के तहत इलाज कराने वाले विदेशी नागरिकों और उनके सहायकों के लिए है. इसके साथ ही अब लगभग 27 बीमा कंपनियां आयुष उपचारों को कवर कर रही हैं. मानकीकरण की दिशा में Bureau of Indian Standards द्वारा ISO 22525 को अपनाया जाना भी मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के लिए अहम कदम माना जा रहा है.
पब्लिक-प्राइवेट मॉडल और ग्लोबल आउटरीच
100 प्रतिशत विदेशी निवेश (FDI), मेडिकल सर्विस एक्सपोर्ट के लिए प्रोत्साहन और अंतरराष्ट्रीय प्रचार अभियानों ने भारत के हेल्थकेयर इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया है. मुंबई (2024) और चेन्नई (2025) में आयोजित आयुष समिट्स से लेकर WHO के वैश्विक मंचों तक, भारत ने अपनी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक हेल्थ ब्रांड के रूप में पेश किया है.
लागत से भरोसे तक का सफर
नीतिगत समर्थन, वीजा सुविधा, बीमा कवरेज और गुणवत्ता मानकों के संगम से भारत की मेडिकल वैल्यू ट्रैवल कहानी अब केवल सस्ता इलाज तक सीमित नहीं रही. यह मॉडल अब भरोसे, गुणवत्ता और समग्र स्वास्थ्य समाधान की ओर बढ़ रहा है, जो भारत को दुनिया के लिए एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करता है.











