सावन में क्यों नहीं खाना चाहिए नॉनवेज फूड, धर्म ही नहीं साइंस से भी जुड़ी है खास वजह

भगवान शिव को समर्पित सावन का पवित्र महीना आस्था और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस पूरे महीने भोलेबाबा के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा और उपवास करते हैं। इस दौरान खाने पीने को लेकर कुछ खास नियम बताए गए हैं। जिनका पालन ना करने पर सेहत और आस्था दोनों को नुकसान होता है। जी हां, सावन के महीने में कुछ लोग प्याज-लहसुन से दूरी बना लेते हैं तो कुछ नॉनवेज खाने से परहेज करते हैं। हालांकि अकसर ज्यादातर लोग भोजन की इन मान्यताओं को सिर्फ धार्मिक नियम से जोड़कर देखते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है, सावन में भोजन को लेकर बताए गए नियमों के पीछे साइंस के भी कई तर्क छिपे हुए हैं। आइए जानते हैं सावन के महीने में नॉनवेज फूड खाने से परहेज क्यों करना चाहिए।
सावन के महीने में नॉनवेज फूड क्यों नहीं खाना चाहिए
पाचन संबंधी दिक्कतें
सावन के महीने में ज्यादातर लोग धार्मिक कारणों की वजह से नॉनवेज नहीं खाते हैं लेकिन इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण भी हैं। दरअसल, बरसात के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने से पाचनशक्ति कमजोर हो जाती है। जबकि नॉन वेज फूड को पचाने में अधिक समय लगता है। डाइजेशन कमजोर होने की वजह से भोजन देर से या अच्छी तरह नहीं पच पाता है, जिससे नॉन-वेज फूड आंतों में सड़ने लगते हैं और व्यक्ति के लिए पेट संबंधी दिक्कतें गैस, एसिडिटी, पेट फूलना और भारीपन के साथ फूड प्वाइजनिंग का खतरा भी बढ़ जाता है।
दूषित पानी
बारिश के समय में नदियों और तलाब का पानी सामान्य दिनों से ज्यादा संक्रमित और दूषित होता है। जिसका सीधा असर मछलियों पर पड़ता है। दूषित पानी में रहने वाली मछलियां हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस से संक्रमित हो सकती हैं, जिनका सेवन करने से सेहत खराब हो सकती है।
जानवर भी हो जाते हैं बीमार
सावन के महीने में लगातार बारिश होने से वातावरण में कीड़े, मकोड़े की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में कई जानवर घास-फूस के साथ बहुत सारे जहरीले कीड़ों का भी सेवन कर लेते हैं। जो उन्हें संक्रमित करके बीमार बना देते हैं। ऐसे जानवरों का मांस खाने से शरीर को नुकसान होता है।
हार्मोनल समस्याएं
बारिश का मौसम खासतौर पर मछलियों के लिए प्रजनन का समय होता है। ऐसे में गर्भधारण की हुई मछली का सेवन करने पर हार्मोनल समस्याएं हो सकती हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि कुछ मछलियों में पारा का स्तर अधिक हो सकता है। पारा एक भारी धातु है जो तंत्रिका तंत्र के विकास को प्रभावित कर सकती है।
संक्रमण का खतरा
सावन के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने की वजह से संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा बना रहता है। ये संक्रमण जानवरों को भी हो सकता है। ऐसे में जानवरों से होने वाले किसी भी संक्रमण से बचने के लिए नॉन वेज से बचने की सलाह दी जाती है।











