नोएडा इंजीनियर युवराज मेहता की मौत: पांच दिन में पांच बड़ी कार्रवाई

नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में SIT जांच कर रही है। जांच में सुरक्षा और बैरिकेडिंग में भारी कमी सामने आई है। मामले में आज एक दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद बिल्डर अभय कुमार सिंह को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

SIT टीम ने मेरठ जोन के ADG भानु भास्कर और मेरठ कमिश्नर भानु चंद्र गोस्वामी के नेतृत्व में घटनास्थल और नोएडा अथॉरिटी कार्यालय की जांच की। जांच के दौरान एम्सड विशटाउन परियोजना के मालिक अभय कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया, जबकि दूसरे बिल्डर की तलाश जारी है। चार दिन बाद NDRF ने युवराज मेहता की कार को पानी भरे गड्ढे से निकाला।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए नोएडा अथॉरिटी के CEO लोकेश एम. को हटाकर वेटिंग लिस्ट में डाला और एक जूनियर इंजीनियर को सस्पेंड किया। SIT को निर्देश दिया गया कि पांच दिन में जांच रिपोर्ट सौंपें।

युवराज मेहता केस में अब तक की कार्रवाई:
1- सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर दो रियल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज।
2- एम्सड विशटाउन प्रोजेक्ट के बिल्डर अभय कुमार सिंह गिरफ्तार।
3- नोएडा अथॉरिटी के CEO लोकेश एम. को हटाकर वेटिंग लिस्ट में डाला।
4- एक जूनियर इंजीनियर सस्पेंड।
5- जिम्मेदार अधिकारियों और बिल्डरों को कारण बताओ नोटिस जारी।

हादसे के बाद SIT ने जांच में पाया कि बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतजामों में गंभीर कमी थी। प्रशासन ने खतरनाक गड्ढों पर स्थायी बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टिव मार्कर और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की। सभी निर्माणाधीन साइटों का 24×7 सुरक्षा ऑडिट शुरू किया गया। SDRF, NDRF और दमकल विभाग के साथ समन्वय मजबूत किया गया और सभी राहत-बचाव इकाइयों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

साथ ही नागरिकों को खतरनाक स्थलों की जानकारी हेल्पलाइन पर देने और असुरक्षित जगहों पर सतर्क रहने की अपील की गई। युवराज का लैपटॉप, चार्जर और बैग अभी भी गायब हैं। SIT टीम कार में मिले सामान की जांच कर रही है।

कोर्ट ने मामले में लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाते हुए जांच में स्पष्ट करने के निर्देश दिए कि नाले या बैरिकेडिंग के जिम्मेदार कौन हैं और उचित कार्रवाई क्यों नहीं की गई।