मुंबई में बिहार भवन को लेकर सियासी विवाद, मनसे ने नीतीश को दिखाया आईना

मुंबई में प्रस्तावित 30 मंजिला बिहार भवन ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। बिहार सरकार ने निर्णय लिया है कि मुंबई या नवी मुंबई में एक ऐसा भवन बनाया जाएगा, जहां बिहार से इलाज कराने आने वाले गंभीर मरीज और उनके परिवार रुक सकेंगे।

मनसे के नेता यशवंत किलेदार ने इस फैसले की निंदा करते हुए कहा कि बिहार सरकार को अपने राज्य में अस्पताल बनाना चाहिए, न कि धर्मशाला। वहीं शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने कहा कि अब जो शिवसेना बीएमसी में सत्ता में आएगी, उसे इस पर अपना पक्ष रखना होगा।

बिहार की भाजपा-जदयू सरकार ने इस परियोजना के लिए 314 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है। प्रस्तावित भवन एल्फिन्स्टन एस्टेट या नवी मुंबई में बनाया जा सकता है। इसका उद्देश्य इलाज के लिए आने वाले बिहारी मरीजों और उनके परिजनों को ठहरने की सुविधा देना है और यह भवन सरकारी बैठकों और प्रशासनिक कार्यों का केंद्र भी होगा।

शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता संजय निरुपम ने मनसे के विरोध को खारिज करते हुए कहा कि यह भवन मानवता से जुड़ा है और हजारों जरूरतमंदों को लाभ देगा। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि यह केवल मानवता से जुड़ी परियोजना है।