मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर के लोगों से की पानी बचाने की अपील, बोले – ‘नल खुला न छोड़ें, RO का बचा पानी भी इस्तेमाल करें’


इंदौर में मानसून की विदाई के 14 दिन बाद ही आने वाली गर्मियों में पानी की कमी को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। दरअसल मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने लोगों से अभी से पानी बचाने की आदत अपनाने की अपील की है। उन्होंने RO के वेस्ट पानी से पोछा लगाने, टंकी में ओवरफ्लो रोकने के लिए अलार्म लगवाने और शावर की जगह बाल्टी से नहाने जैसे उपाय बताए हैं। वहीं दूसरी ओर नगर निगम रोज 3 करोड़ लीटर उपचारित पानी दोबारा इस्तेमाल करने की योजना पर काम कर रहा है।
दरअसल मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि आम तौर पर इंदौर में 30 से 40 इंच बारिश होती है जबकि इस बार मालवा-निमाड़ में औसतन 20 से 21 इंच बारिश हुई है। उन्होंने लोगों से परिवार के साथ बैठकर पानी बचाने का चार्ट बनाने और रोजमर्रा के कामों में पानी की बर्बादी रोकने की अपील की है।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताए ये तरीके
वहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पानी बचाने की शुरुआत घर से होनी चाहिए। कई बार टंकी भरने के बाद भी पानी बहता रहता है। इसे रोकने के लिए घरों में अलार्म लगवाने की सलाह दी गई है ताकि टंकी भरते ही लोगों को पता चल जाए। उन्होंने RO से निकलने वाले वेस्ट पानी को बेकार समझकर फेंकने के बजाय पोछा लगाने जैसे कामों में इस्तेमाल करने की बात कही है। इससे रोजमर्रा के कामों में साफ पानी की खपत कम की जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने शावर के बजाय बाल्टी से नहाने और बर्तन धोते समय नल लगातार खुला नहीं रखने की भी अपील की। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि परिवार के सभी सदस्य मिलकर पानी बचाने का चार्ट बनाएं और तय करें कि घर में कहां पानी की खपत कम की जा सकती है। उन्होंने नवरात्रि के दौरान माता के सामने पानी बचाने का संकल्प लेने की अपील भी की है। उनका कहना है कि इंदौर से पानी बचाने का संदेश पूरे मालवा-निमाड़ में जाना चाहिए।
रोज 3 करोड़ लीटर उपचारित पानी का होगा इस्तेमाल
दरअसल घरों में पानी बचाने की अपील के साथ नगर निगम भी ताजे पानी की मांग कम करने की तैयारी कर रहा है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बुधवार को अमृत प्रोजेक्ट और सीवरेज विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर योजनाओं की समीक्षा की है। नगर निगम की योजना चार जगह कुल 30 एमएलडी क्षमता के टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की है। इनसे रोज करीब 3 करोड़ लीटर उपचारित पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इस पानी का इस्तेमाल उन कामों में किया जाएगा जहां पीने योग्य पानी की जरूरत नहीं होती।
प्रस्तावित प्लांट सांवेर औद्योगिक क्षेत्र में 3 एमएलडी, कनाड़िया में 8 एमएलडी, टिगरिया बादशाह तालाब में 9 एमएलडी और कबिटखेड़ी एसटीपी परिसर में 10 एमएलडी क्षमता के होंगे। उपचारित पानी का इस्तेमाल उद्यानों की सिंचाई, सड़कों की धुलाई, निर्माण कार्य, सीवर सफाई और धूल नियंत्रण में किया जा सकेगा। सरकारी भवनों, अस्पतालों, एयरपोर्ट, मेट्रो और औद्योगिक क्षेत्रों तक भी इसकी आपूर्ति की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। दरअसल योजना का मकसद ऐसे कामों के लिए नर्मदा सहित ताजे पानी के स्रोतों पर निर्भरता घटाना है।
21.59 करोड़ रुपए से बनेगा ट्रीटेड वाटर नेटवर्क
दरअसल ‘जल ही अमृत’ परियोजना के तहत उपचारित पानी जमा करने और अलग पाइपलाइन से पहुंचाने के लिए 21.59 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है। योजना में स्कीम नंबर 78 में 30 लाख लीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक और कबिटखेड़ी एसटीपी परिसर में 15 लाख लीटर क्षमता का ग्राउंड स्टोरेज रिजर्वायर बनाने की बात शामिल है। इसके साथ पंपिंग व्यवस्था और पानी बांटने वाली पाइपलाइन भी विकसित की जाएगी। प्रस्तावित नेटवर्क से निपानिया, बॉम्बे हॉस्पिटल क्षेत्र, महालक्ष्मी नगर, देवास नाका और न्यू लोहा मंडी सहित चिन्हित इलाकों तक उपचारित पानी पहुंचाने की योजना भी है।
नगर निगम 133 उद्यानों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इनमें 23 मौजूदा और 110 नए उद्यान शामिल हैं। इसके अलावा 30 हाइड्रेंट लगाने का प्रस्ताव है। उद्यानों की सिंचाई और दूसरे गैर-पेयजल कामों में उपचारित पानी इस्तेमाल होने से पीने योग्य पानी की बचत हो सकती है। हालांकि, इसके लिए पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच, अलग वितरण व्यवस्था और प्रस्तावित प्लांटों व पाइपलाइन का काम समय पर पूरा होना जरूरी होगा।











