सरकार बनते ही बांग्लादेश में संविधान सुधार को लेकर BNP और जमात में टकराव

बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के साथ ही सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच संविधान सुधार को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार ने शपथ ग्रहण कर लिया है और करीब 50 सदस्यीय मंत्रिमंडल में अधिकांश नए चेहरों को शामिल किया गया है। लगभग 20 वर्षों बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सत्ता में वापसी हुई है, जबकि जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी है।

सरकार बनने के पहले ही दिन संविधान सुधार आयोग में भागीदारी को लेकर दोनों दल आमने-सामने आ गए। BNP का कहना है कि संविधान में इस तरह के आयोग में शपथ लेने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जबकि जमात ने चेतावनी दी है कि यदि BNP आयोग में शामिल नहीं होती है तो उनके सांसद भी संसद सदस्य के रूप में शपथ नहीं लेंगे। इस मुद्दे ने देश की नई राजनीतिक स्थिति में तनाव पैदा कर दिया है।

यह संविधान सुधार आयोग अंतरिम सरकार के दौरान गठित किया गया था, जिसका नेतृत्व मुहम्मद यूनुस कर रहे थे। आयोग का उद्देश्य संविधान की समीक्षा करना और भविष्य में किसी भी तरह की तानाशाही व्यवस्था को रोकने के लिए आवश्यक बदलाव सुझाना था। आयोग ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के लिए अधिकतम दो कार्यकाल की सीमा तय करने, संसद को द्विसदनीय बनाने और सांसदों की न्यूनतम आयु 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष करने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इसके अलावा संविधान से कुछ पुराने सिद्धांतों को हटाकर समानता, मानव गरिमा और सामाजिक न्याय जैसे नए सिद्धांत जोड़ने की सिफारिश की गई है।

हाल ही में हुए चुनावों में BNP ने 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि जमात और उसके सहयोगियों ने 77 सीटें जीतीं। इस चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। नई सरकार बनने के साथ ही संविधान सुधार को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले समय में बांग्लादेश की राजनीति को और अधिक प्रभावित कर सकता है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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