एमपी में 2.50 करोड़ का आदिवासी भूमि घोटाला: पटवारी और 7 बिचौलियों पर EOW की FIR, अल्ट्राटेक सीमेंट को फर्जी तरीके से बेची जमीन

मैहर: आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) रीवा ने मैहर जिले में आदिवासियों की बेशकीमती कृषि भूमि को फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेचने के बड़े खेल का पर्दाफाश किया है. इस मामले में तत्कालीन पटवारी समेत कुल 8 लोगों के खिलाफ जालसाजी और भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. आरोप है कि आरोपियों ने मिलकर 3.500 हेक्टेयर जमीन, जिसकी बाजार दर करीब 2.50 करोड़ रुपये है, उसे अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी को फर्जी तरीके से हस्तांतरित कर दिया.
जिंदा किसान को सरकारी रिकॉर्ड में ‘मार’ डाला
EOW के एसपी डॉ. अरविंद सिंह ठाकुर के अनुसार, पूरा मामला मैहर तहसील के भदनपुर (दक्षिण पट्टी) का है. यहां आदिवासी रामसिंह गोड़ के नाम पर दर्ज जमीन को हड़पने के लिए तत्कालीन पटवारी अशोक सिंह ने बिचौलियों के साथ मिलकर एक खौफनाक साजिश रची. वर्ष 2012-13 के रिकॉर्ड में पटवारी ने रामसिंह गोड़ के जीवित रहते हुए भी उनके पुत्र राजेंद्र सिंह का नाम ‘वारिसाना’ के रूप में दर्ज कर दिया, जबकि इसके लिए किसी भी सक्षम अधिकारी का आदेश नहीं था. जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने अनपढ़ आदिवासियों को बैंक लोन दिलाने का लालच दिया और इसी बहाने उनकी जमीन की रजिस्ट्री अल्ट्राटेक सीमेंट के नाम करवा दी.
इन आरोपियों पर गिरी गाज
ईओडब्ल्यू ने जांच और सत्यापन के बाद तत्कालीन पटवारी अशोक सिंह सहित शोभा प्रसाद कोल (बदेरा), बैजनाथ कोल (नादन देहात), दीपक लालवानी (मैहर), गोपाली उर्फ गोपाल आसवानी (मैहर), अज्जू उर्फ अजय सावलानी (मैहर), कमला उर्फ प्रदीप सेन (मैहर) और रामप्रकाश जायसवाल (भदनपुर) बिचौलियों को आरोपी बनाया है.
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई
सभी आरोपियों के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (फर्जी दस्तावेज तैयार करना), 120 बी (साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है. ईओडब्ल्यू का कहना है कि इस घोटाले में कुछ अन्य राजस्व अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन्हें जल्द ही आरोपी बनाया जा सकता है.











