सुपौल में तीन हत्यारोपी को आजीवन कारावास की सजा, प्रदीप को गोली मार की थी हत्या

सुपौल : करीब 6 वर्ष पूर्व चुनावी रंजिश के चलते एक युवक की गोली मारकर की गई हत्या के एक मामले में गुरुवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. हत्या के इस मामले में सुनवाई उपरांत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत सिंह की कोर्ट ने तीन अभियुक्तों को दोषी करार करते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. मामला बीरपुर थाना कांड संख्या 85/20 तथा सत्रवाद संख्या 205/2020 से संबंधित है.
इसमें प्रतापगंज थाना क्षेत्र के भैरवा निवासी प्रदीप कुमार की मौत गोली लगने से तब हो गई जब वे अपने मामा बीरपुर थाना क्षेत्र के जागी एराजी कोशिकापुर वार्ड नंबर 12 निवासी गणेश प्रसाद यादव के साथ मोटर साइकिल पर सवार होकर राम जानकी चौक बनेलीपट्टी स्थित गोदाम से वापस मामा के घर लौट रहे थे.
गोलीबारी की उक्त घटना में प्रदीप की मौत घटनास्थल पर ही हो गई जबकि मामा गणेश प्रसाद यादव गंभीर रूप से घायल हो गए थे. मामले को लेकर गणेश प्रसाद यादव की पत्नी परिता देवी ने उक्त मुकदमा दर्ज करवाई थी. इसमें 13 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था.
दर्द मामले में परिता देवी ने कहा था कि 7 मई 2020 की रात करीब 8 बजे उनके पति गणेश यादव और उनका भांजा प्रदीप यादव कोशिकापुर राम जानकी चौक स्थित अपने गोदाम को बंद कर बाइक से घर लौट रहे थे इसी दौरान बाढ़ आश्रय स्थल टिहली भवन के पास पूर्व से घात लगाए 13 लोगों ने उन दोनों पर फायरिंग शुरू कर दी. इसमें गोली लगने से भांजा प्रदीप कुमार की मौत घटनास्थल पर ही हो गई.
जबकि उनके पति बुरी तरह से घायल हो गए थे. घटना का कारण पैक्स चुनाव का रंजिश बताया गया था. सुनवाई उपरांत कोर्ट ने बौराहा वार्ड नंबर 7 निवासी जगदीश कोरोगिया, जागीर एराजी कोशिकापुर वार्ड नंबर 12 निवासी मनीष कुमार यादव तथा जागीर एराजी कोशिकापुर वार्ड नंबर 13 निवासी कुंदन कुमार गोयत को दोषी करार करते हुए भादवि की धारा 302/34 के तहत तीनों को आजीवन कारावास तथा 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है.
अर्थ दंड की राशि नहीं देने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी. भादवि की धारा 307/34 के तहत तीनों को 10 वर्ष का कारावास तथा 10-10 हजार अर्थ दंड, अर्थ दंड की राशि नहीं देने पर 3 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. कोर्ट ने जगदीश कोरोगिया तथा मनीष कुमार यादव को 27 आर्म्स एक्ट के तहत भी दोषी पाया है इसके तहत दोनों को 4 वर्ष कारावास तथा 5-5 हजार अर्थ दंड की सजा सुनाई है. अर्थ दंड की राशि नहीं देने पर दोनों को एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जहां सुनाई गई सभी सजाएं साथ-साथ चलेगी वहीं पूर्व में कारा में बिताई गई अवधि दी गई सजा में समायोजित की जाएगी. हालांकि कोर्ट ने इस मामले में नौ लोगों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है जबकि एक अभियुक्त की मृत्यु हो गई थी.
इस पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक अमर कुमार दास तथा बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विनोद कांत झा, राजकुमार सिंह, तेज नारायण गुप्ता तथा संजय कुमार सिंह ने बहस में हिस्सा लिया. अपर लोक अभियोजक ने बताया कि इस पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 26 गवाहों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया था जबकि बचाव पक्ष की ओर से तीन गवाह प्रस्तुत हुए थे.











