चंडीगढ़ IDFC बैंक घोटाले में बड़े अधिकारी शामिल? ACB ने पब्लिक सर्वेंट्स के खिलाफ भी दर्ज की एफआईआर

IDFC मामले में एक्शन हुआ है. हरियाणा सरकार के स्टेट विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो ने FIR दर्ज कर ली है. बैंक अधिकारियों, पब्लिक सर्वेंट्स और मामले से सीधे तौर पर जुड़े अन्य व्यक्तियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है.

IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़े 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले ने हरियाणा की सियासत में भूचाल ला दिया है. विपक्ष सरकार पर हमलावर है. इस बीच पूरे मामले में हरियाणा सरकार के स्टेट विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो ने FIR दर्ज कर ली है. बैंक अधिकारियों, पब्लिक सर्वेंट्स और मामले से सीधे तौर पर जुड़े अन्य व्यक्तियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है.

आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 के सेक्शन 13(2), BNS (भारतीय न्याय संहिता) के सेक्शन 316(5), क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट के सेक्शन 318(4) के तहत FIR दर्ज की गई है. शिकायत में प्रॉपर्टी देने या कीमती सिक्योरिटी बनाने/बदलने/नष्ट करने के लिए गंभीर धोखाधड़ी और बेईमानी से लालच देना शामिल है.

सीएम सैनी ने विधानसभा में क्या कहा?

इससे पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि राज्य का एंटी-करप्शन ब्यूरो मामले की गहराई से जांच करेगा और भरोसा दिलाया कि दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. सैनी ने कहा कि राज्य सरकार ने IAS अधिकारियों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाने का भी फैसला किया है जो इस मामले को देखेगी और जांच करेगी

सैनी ने सदन को भरोसा दिलाया कि जांच के आदेश दे दिए गए हैं और राज्य का एंटी-करप्शन ब्यूरो और विजिलेंस मामले की जांच कर रहे हैं और पूरी जांच करेंगे. सीएम सैनी ने कहा कि चाहे बैंक का कर्मचारी हो या सरकारी कर्मचारी, जो भी इसमें शामिल पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा. सीएम ने कहा, हमने मामला एंटी-करप्शन ब्यूरो को सौंप दिया है और केस दर्ज कर लिया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने एक हाई-लेवल कमेटी बनाने का भी फैसला किया है, जिसमें IAS अधिकारी शामिल होंगे और जो इस मामले को देखेगी.

बैंक को किया गया डी-एम्पैनल्ड

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के डिपार्टमेंट्स की अलर्टनेस की वजह से यह मामला सामने आया, जिसके बाद सरकार ने तुरंत बैंक को डी-एम्पैनल्ड कर दिया. विपक्ष के हमले का जवाब देते हुए सैनी ने कहा कि अलग-अलग सरकारी डिपार्टमेंट अपना पैसा उन बैंकों में जमा करते हैं जो पैनल में हैं और यह कोई नई बात नहीं है. ऐसा पहले भी होता रहा है. कांग्रेस के समय में भी डिपार्टमेंट का पैसा बैंकों में रखा जाता था

CM ने कहा कि बैंकों को समय-समय पर एम्पैनल्ड किया जाता है और नए बैंक भी जुड़ते रहते हैं. रविवार को की गई एक रेगुलेटरी फाइलिंग में IDFC फर्स्ट बैंक ने कहा कि उसने इस मामले की जानकारी बैंकिंग रेगुलेटर को दे दी है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है.

IDFC फर्स्ट बैंक की फाइलिंग में कहा गया है, पहली नजर में चंडीगढ़ की एक खास ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने हरियाणा राज्य सरकार के कुछ खास अकाउंट्स में बिना इजाजत और धोखाधड़ी वाली गतिविधियां की हैं और इसमें शायद दूसरे लोग/एंटिटी/काउंटरपार्टी भी शामिल हो सकते हैं.

विपक्ष के नेता भूपिंदर हुड्डा ने हरियाणा विधानसभा में यह मुद्दा उठाया. जवाब में सीएम सैनी ने कहा कि गड़बड़ियां पता चलने के बाद, सरकार ने तुरंत फंड को दूसरे फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन में ट्रांसफर करने का फैसला किया. उन्होंने आगे कहा कि IDFC फर्स्ट बैंक में जमा हरियाणा सरकार के फंड का एक बड़ा हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में इन्वेस्ट किया गया था. उन्होंने सदन में कहा, सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है, चाहे वह बैंक कर्मचारी हो या कोई और कर्मचारी, जो भी इसमें शामिल होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

पैसा पूरी तरह सुरक्षित

भूपिंदर हुड्डा ने कहा कि बैंक ने गड़बड़ियों का पता लगाया और सरकार से मांग की कि वह सदन को बताए कि उसने क्या कार्रवाई की है. CM सैनी ने कहा कि रविवार को रेगुलेटरी फाइलिंग में बैंक के खुलासा करने से बहुत पहले सरकार ने कार्रवाई की और उसे डी-एम्पेनल्ड कर दिया. 18 फरवरी को राज्य सरकार ने बैंक को डी-पैनल कर दिया और निर्देश दिया कि पूरी रकम ब्याज के साथ एक नेशनलाइज्ड बैंक में ट्रांसफर कर दी जाए. पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है. उन्होंने कहा कि एक-एक रुपया वसूल किया जाएगा.

IDFC फर्स्ट बैंक ने कहा कि शुरुआती इंटरनल रिव्यू किया गया था और यह मामला हरियाणा सरकार के सरकारी-लिंक्ड अकाउंट्स के एक खास ग्रुप तक ही सीमित है जिसे चंडीगढ़ में उस ब्रांच के जरिए ऑपरेट किया जाता है. बैंक ने कहा कि यह चंडीगढ़ ब्रांच के दूसरे कस्टमर्स तक नहीं फैला है.

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