नर्मदा तट पर 300 मीटर दायरे में बिक रहे फार्म हाउस, सरकारी नहर और जमीन पर अवैध निर्माण

जबलपुर। नर्मदा तट के 300 मीटर प्रतिबंधित दायरे में अवैध निर्माण का खेल तेज हो गया है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में पहले अवैध कॉलोनियां विकसित करने वाले बिल्डर अब नर्मदा किनारे फार्म हाउस और प्लॉट बेच रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कई स्थानों पर सरकारी नहर और जमीन पर भी निर्माण कर दिया गया है। प्रशासन ने सख्ती के संकेत दिए हैं, लेकिन जमीन पर अवैध गतिविधियां जारी हैं।
जानकारी के अनुसार, जमतरा, भेड़ाघाट और सगड़ा-बरेला मार्ग सहित कई तटीय क्षेत्रों में 300 मीटर के दायरे में फार्म हाउस विकसित किए गए हैं। कई मामलों में कृषि भूमि का डायवर्सन कराए बिना ही उसे फार्म हाउस और प्लॉट में बदलकर बेचा जा रहा है। स्थानीय लोगों ने शिकायत की है कि निजी घाट और बाउंड्रीवाल बनाकर उनके आने-जाने पर भी रोक लगाई जा रही है।
टीएनसीपी की आड़, रेरा के बिना बिक्री
कई कॉलोनियों में टीएनसीपी की अनुमति का हवाला देकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं, जबकि रेरा पंजीयन नहीं कराया गया है। पर्ल एवेन्यू कॉलोनी में सरकारी नहर पर पुलिया डालकर उसे पक्का कर दिया गया। पुलिया इतनी संकरी बनाई जा रही है कि पानी का प्रवाह बाधित होने की आशंका है। इसी रास्ते से भारी हाइवा और ट्रक गुजर रहे हैं, जिससे नहर और आसपास की संरचना को नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
सरकारी नहर पर कब्जे के आरोप
नहर के दोनों ओर निजी निर्माण कर लिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, संबंधित विभागों को भ्रामक जानकारी देकर निर्माण की अनुमति ली गई। स्थानीय पटवारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है। तहसील स्तर पर इस मामले की जानकारी तक नहीं होने की बात सामने आई है।
कलेक्टर के निर्देश पर कार्रवाई
कुछ दिन पहले कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर नर्मदा से लगे फार्म हाउस पर कार्रवाई की गई थी। अवैध घाट, सड़क और बाउंड्रीवाल तोड़ी गईं, लेकिन आगे की प्रक्रिया लंबित है। एसडीएम अभिषेक सिंह ने बताया कि पर्ल एवेन्यू सहित अन्य क्षेत्रों में सरकारी नहर पर पुलिया और निर्माण की जांच कराई जाएगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नर्मदा तट के पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। बावजूद इसके, तटीय क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और निर्माण का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है।











