बिहार: सुपौल में फंस गए 341 विद्यालयों के सरकारी प्रधानाध्यापक, विभाग ने जारी किया आदेश

सुपौल: सुपौल में अब शिक्षा विभाग भी सरकारी शिक्षकों के खिलाफ कड़े रूख अपनाने लगे हैं. बार-बार स्कूल से शिक्षक गायब तो बच्चे की कम उपस्थिति की शिकायत मिलती ही रहती है. इतना ही ई-शिक्षा काेष पर शिक्षकों का हाजिरी नहीं बन पाता है.
जिसको लेकर बार-बार स्पष्टीकरण भी पूछा जाता है. लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं हाे पाता है. इतना ही कर्तव्य में लापरवाही, उच्चाधिकारी के आदेश की भी सरकारी शिक्षकों के लिए कोई मायने नहीं रहता है. बार-बार आदेश व पत्र जारी होने के बावजूद अपने आदत से बाज नहीं आ रहे हैं, इसी कड़ी में जिले के सरकारी विद्यालयों में इको क्लब फार मिशन लाइफ योजना के तहत आवंटित राशि खर्च नहीं करने पर शिक्षा विभाग ने सख्ती दिखाते हुए 341 विद्यालयों से स्पष्टीकरण की मांग करते हुए कार्यवाही की चेतावनी दी है.
जिला शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह ने इन सभी प्रधानाध्यापकों को चेतावनी जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर राशि खर्च करने और स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है. इसको लेकर जारी पत्र में डीईओ ने कहा है कि उक्त विद्यालयों के प्रधान को बार-बार निर्देश के बावजूद योजना की राशि का उपयोग नहीं किया गया, जिससे छात्रों के विकास से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं. इसे घोर लापरवाही और उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना माना गया है.
आपको बता दें पत्र में स्पष्ट किया है कि 31 मार्च 2026 के बाद राशि की वैधता समाप्त हो जाएगी. इसके बाद जिन विद्यालयों द्वारा राशि का उपयोग नहीं किया जाएगा, उन्हें चिन्हित कर आर्थिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी. ऐसे में प्रधानाध्यापकों पर समय सीमा के भीतर राशि खर्च कर रिपोर्ट देने का दबाव बढ़ गया है.











