US Israel Iran Attack: इजराइल और ईरान जंग पर भारत की पैनी नजर, PM मोदी ने आज बुलाई CCS की बैठक

ईरान पर US-इजराइली हमलों से शुरू हुए मिडिल ईस्ट विवाद को देखते हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार रात दिल्ली लौटने पर कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मीटिंग की अध्यक्षता करेंगे. सरकारी सूत्रों के अनुसार, “उनके दो दिन के दौरे के बाद रात करीब 9:30 बजे दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है.” पीएम मोदी दिन में पहले कुछ प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करने के लिए तमिलनाडु में थे. इस मीटिंग का फोकस ईरान में हो रहे घटनाक्रम, UAE और मिडिल ईस्ट के दूसरे हिस्सों में फंसे भारतीयों; और उससे जुड़े घटनाक्रमों पर चर्चा होने के आसार हैं.
पीएम मोदी 25-26 फरवरी को इजराइल गए थे, यह दौरा काफी डिप्लोमैटिक गर्मजोशी वाला रहा था. दोनों देशों ने एक-दूसरे मजबूती से खड़े होने की बात कही थी. इस दौरान दोनों देशों ने 16 एग्रीमेंट साइन किए गए थे, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिफेंस, एग्रीकल्चर, एनर्जी और कल्चरल एक्सचेंज शामिल हैं और अपने रिश्तों को एक स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया.
US-ईरान जंग पर भारत ने जताई चिंता
भारत के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा कि देश झगड़े की स्थिति को लेकर “बहुत चिंतित” है. इसमें यह भी कहा गया कि “तनाव कम करने और अंदरूनी मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी अपनाई जानी चाहिए”, और “सभी देशों की सॉवरेनिटी और टेरिटोरियल इंटीग्रिटी का सम्मान किया जाना चाहिए”.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और इजराइली समकक्ष गिदोन सार से अलग-अलग फोन पर बात की. अराघची के साथ कॉल के बाद, जयशंकर ने कहा कि उन्होंने “ईरान और इलाके में हाल के डेवलपमेंट पर भारत की गहरी चिंता शेयर की है.” सार से बात करने के बाद, उन्होंने कहा कि उन्होंने “तनाव कम करने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी की भारत की अपील” को दोहराया है.
फंसे भारतीयों को बाहर निकालना प्राथमिकता
तेहरान, तेल अवीव, अबू धाबी और दमिश्क में भारतीय दूतावासों ने 28 फरवरी को एडवाइजरी जारी की, जिसमें भारतीय नागरिकों से गैर-जरूरी यात्रा से बचने, ट्रैवल डॉक्यूमेंट तैयार रखने, MADAD पोर्टल पर रजिस्टर करने और लोकल सिक्योरिटी गाइडेंस का पालन करने के लिए कहा गया.
भारत ने ईरान, इजराइल, जॉर्डन, कतर, UAE और फिलिस्तीन में अपने नागरिकों को भी बहुत सावधानी बरतने और चौकन्ना रहने की सलाह दी. नई दिल्ली इस इलाके के किसी भी देश से भारतीय नागरिकों को निकालने पर तुरंत विचार नहीं कर रही थी, क्योंकि एयरस्पेस बंद और खतरनाक है.
लगभग 10,000 भारतीय नागरिक ईरान में रहते और काम करते हैं, जबकि पूरे वेस्ट एशिया/मिडिल ईस्ट इलाके में यह संख्या लगभग 9.6 मिलियन है. MEA ने कहा कि पूरे इलाके में भारतीय मिशन नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में हैं और हेल्पलाइन चालू कर दी गई हैं.











