धान पर घमासान, अफीम पर संग्राम! लखमा के ‘आंकड़ों’ और चंद्राकर के ‘आरोपों’ से गरमाया सदन, हुई तीखी बहस

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहा. सदन में जब धान खरीदी में हो रही देरी और दुर्ग जिले के समोदा गांव में मिली अफीम की अवैध खेती का मुद्दा उठा, तो सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. दोनों ही मामलों ने सदन का माहौल इतना गरमा दिया कि कार्यवाही को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा.
सदन में चर्चा के दौरान वरिष्ठ विधायक कवासी लखमा ने बस्तर संभाग के किसानों का मुद्दा बड़े प्रभावी ढंग से उठाया. उन्होंने सदन को जानकारी दी कि बस्तर संभाग के पांच जिलों में करीब 32 हजार 200 से अधिक आदिवासी किसान ऐसे हैं, जिनका धान अब तक नहीं खरीदा गया है. लखमा ने कहा कि इन किसानों को टोकन तो जारी कर दिए गए थे, लेकिन खरीदी केंद्रों पर उनका धान नहीं उठाया जा रहा है. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि “अगर किसानों का धान समय पर नहीं बिका और वे कर्ज के बोझ तले दब गए, तो इसका जिम्मेदार आखिर कौन होगा?” उन्होंने मांग की कि सरकार इन हजारों किसानों के लिए तुरंत कोई रास्ता निकाले.
धान खरीदी के मुद्दे के बाद दुर्ग जिले के समोदा गांव में पकड़ी गई अफीम की अवैध खेती पर चर्चा शुरू हुई. नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग करते हुए इसे प्रशासन की बड़ी लापरवाही बताया. इस पर पलटवार करते हुए भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने ऐसा दांव चला कि विपक्ष के होश उड़ गए. चंद्राकर ने बड़े ही चटपटे अंदाज़ में कहा कि यह अफीम रातों-रात नहीं उगी है, बल्कि इसकी जड़ें पिछले चार सालों (कांग्रेस शासनकाल) के ‘खास संरक्षण’ में गहराई तक जमी हुई हैं. उन्होंने सीधा इशारा किया कि एक पूर्व मंत्री की सरपरस्ती में यह काला कारोबार फल-फूल रहा था.चंद्राकर के इस बयान के बाद सदन में काफी शोर-शराबा हुआ.
मामले में दखल देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस इस मामले में असली आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है. उनके अनुसार, रसूखदार लोगों का नाम सामने आने के बाद भी एफआईआर (FIR) में सिर्फ उनके नौकर को मुख्य आरोपी बनाया गया है. दूसरी ओर, गृहमंत्री ने सदन को बताया कि पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 6,242 किलोग्राम अफीम जब्त की है, जिसकी कीमत करीब 7.80 करोड़ रुपये है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है.
विपक्ष सरकार के जवाबों से संतुष्ट नहीं हुआ और नारेबाजी करते हुए सदन के बीचों-बीच (गर्भगृह) पहुंच गया. हंगामे को बढ़ता देख सभापति ने सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित कर दी. आज की पूरी चर्चा से साफ है कि धान खरीदी और अफीम का मुद्दा आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में और चर्चा का विषय बना रहेगा.