बिकते-बिकते बचा IDBI बैंक! सस्ते में लग रही थी बोली, सरकार ने ऐन मौके पर रोक दी डील

पिछले करीब पांच सालों से जिस आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) की हिस्सेदारी बेचने की तैयारी चल रही थी, अब उस पूरी प्रक्रिया को संभवतः बिल्कुल शुरुआत (जीरो) से दोबारा शुरू किया जाएगा. इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को बैंक बेचने के लिए जो वित्तीय बोलियां (फाइनेंशियल बिड्स) मिली थीं, वे तय की गई न्यूनतम कीमत (रिजर्व प्राइस) से काफी कम रह गईं. इसी वजह से पिछले हफ्ते इस पूरी कवायद को रोक दिया गया.
कहां हुई सबसे बड़ी चूक?
इस रुकावट की मुख्य वजह ‘रिजर्व प्राइस’ तय करने का वह तरीका है, जिस पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं. जानकारों के मुताबिक, बैंक की न्यूनतम बिक्री कीमत तय करने के लिए शेयर बाजार में इसके भाव पर जरूरत से ज्यादा भरोसा किया गया था. असली पेंच यह है कि आईडीबीआई बैंक के केवल 5 प्रतिशत शेयर ही पब्लिक के पास हैं. बैंक का 45.48 प्रतिशत हिस्सा खुद सरकार के पास और 49.24 प्रतिशत हिस्सा भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास सुरक्षित है. जब बाजार में जनता के बीच इतने कम शेयर मौजूद होते हैं, तो उनकी कीमत में आसानी से भारी उतार-चढ़ाव आ सकता है. इससे बाजार में जोड़-तोड़ (मार्केट मैनिपुलेशन) का खतरा काफी बढ़ जाता है. माना जा रहा है कि इसी गलत मूल्यांकन के कारण बोलियां उम्मीद से कम आईं. अब सरकार एक अहम पैनल जल्द ही इन सभी पहलुओं की गहराई से समीक्षा करेगा और प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने पर अंतिम मुहर लगाएगा.