कुलगुरु नियुक्ति विवाद में हाईकोर्ट सख्त, जवाब न देने पर राज्य सरकार पर 5 हजार का जुर्माना

जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य शासन पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने पूर्व निर्देशों के बावजूद जवाब प्रस्तुत न किए जाने पर यह कार्रवाई की है।
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने राज्य सरकार को जवाब पेश करने के लिए अंतिम अवसर देते हुए मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल तय की है। बताया गया कि इस प्रकरण में अप्रैल 2025 में ही नोटिस जारी कर दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी शासन की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया।
मामले में जबलपुर निवासी एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष सचिन रजक ने याचिका दायर कर कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा की नियुक्ति को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनिवार्य नियमों की अनदेखी की गई।
याचिकाकर्ता का कहना है कि कुलगुरु पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के मानकों का पालन नहीं किया गया। नियमों के अनुसार पीएचडी के बाद कम से कम 10 वर्ष का शैक्षणिक अनुभव जरूरी होता है, जिसका पालन नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
इसके अलावा, प्रो. वर्मा की पूर्व प्राध्यापक पद पर नियुक्ति को भी प्रक्रियागत खामियों से जुड़ा बताया गया है, जिससे कुलगुरु पद पर उनकी नियुक्ति पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।