दाउदनगर स्थापना दिवस: जश्न के शोर में ‘जनक’ को भूले आयोजक, मर्यादा और परंपराओं की उड़ीं धज्जियां

औरंगाबाद : दाउदनगर अनुमंडल का 35वां स्थापना दिवस समारोह अपनी भव्यता से ज्यादा प्रशासनिक लापरवाही और आयोजकों की अदूरदर्शिता के लिए याद किया जाएगा.सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर आयोजित इस उत्सव में न केवल परंपराओं की अनदेखी की गई, बल्कि मर्यादाओं को भी ताक पर रख दिया गया.

सबसे विचलित करने वाली बात यह रही कि जिस महापुरुष के भगीरथ प्रयासों से दाउदनगर को अनुमंडल का गौरव प्राप्त हुआ, आयोजक मंच पर उन्हें ही स्थान देना भूल गए. अनुमंडल स्थापना के असली सूत्रधार और पूर्व मंत्री स्व. रामविलास सिंह के प्रति प्रशासन का रवैया बेहद उदासीन दिखा.

पूरे कार्यक्रम के दौरान मंच पर उनका एक तैल चित्र तक नहीं लगाया गया.कुछ लोगों का तर्क है कि सुबह माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया था, लेकिन सवाल उठता है कि क्या शाम का मुख्य समारोह स्थापना दिवस का हिस्सा नहीं था? जब मंच से अनुमंडल के इतिहास का बखान हो रहा हो, तब उसके ‘जनक’ को दरकिनार करना कृतघ्नता ही कही जाएगी.

बिहार गीत का अपमान: तकनीकी फेल्योर या संवेदनहीनता?

कार्यक्रम की शुरुआत में ही उस वक्त असहज स्थिति पैदा हो गई जब ‘बिहार गीत’ के सम्मान में ओबरा विधायक डॉ. प्रकाश चंद्र, गोह विधायक अमरेंद्र कुशवाहा, एसडीओ अमित राजन और चारों प्रखंडों के बी़डीओ सहित जनता खड़ी हुई.गान शुरू होते ही मात्र दो लाइन बाद तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गया.इसके बाद न तो किसी ने माफी मांगी और न ही दोबारा गीत शुरू करवाने की जहमत उठाई गई.

अंततः कलाकार और शिक्षक गोविंदा राज ने सूझबूझ दिखाते हुए बिना संगीत के ही आधा-अधूरा बिहार गीत गाकर वहां मौजूद गणमान्य और आम जनता की लाज रख ली.

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