210 सालों में इन 3 नदियों का बदला रूट…नेपाल-भारत के बीच सीमा विवाद की असल कहानी

नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है. नेपाल की संसद में प्रधानमंत्री बालेन शाह के बयान पर मचा घमासान अभी थमा भी नहीं था कि सत्तारूढ़ दल आरएसएस के अध्यक्ष रवि लामिछाने नई दिल्ली पहुंच गए हैं. लामिछाने यहां आकर सीमा विवाद के समाधान की कोशिश कर रहे हैं. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, दोनों देशों के बीच सीमा संबंधी 98 प्रतिशत विवाद सुलझ चुके हैं. हालांकि, गंडक नदी के मार्ग में बदलाव के कारण कुछ विवाद बने हुए हैं, जिन्हें दोनों पक्ष आपसी बातचीत के जरिए आसानी से सुलझा सकते हैं.

नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद की शुरुआत 2020 के आसपास हुई, जब नेपाल ने कालापानी पर अपना दावा जताया. नेपाल का कहना था कि सुगौली संधि के तहत कालापानी और लिपुलेख की मैपिंग गलत तरीके से की गई थी और ये क्षेत्र वास्तव में नेपाल का हिस्सा हैं.

इसके बाद नेपाल और भारत, दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे पेश किए. इन दावों के अनुसार, 3 ऐसी नदियां हैं जिनके मार्ग बदलने से दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और ज्यादा गहरा गया.

पहले सुगौली संधि को समझिए

4 मार्च को 1816 को सुगौली संधि पर हस्ताक्षर हुआ था. नदियों को केंद्र में रखकर उस वक्त ब्रिटिश शासन ने भारत और नेपाल के बीच की सीमा तय की थी. नेपाल और भारत के बीच 1751 KM की सीमा है. जो पूरी तरह खुली हुई है.

दावे के मुताबिक संधि के दौरान नेपाल के तत्कालीन महाराजा बिक्रम साह ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को कई जगहों पर जमीन दान में दी थी. इनमें काली और राप्ती नदियों के बीच का पूरा निचला इलाका शामिल था.

कहा जाता है कि सीमा विभाजन के बाद नेपाल का कुल क्षेत्रफल 147,000 वर्ग किलोमीटर था.

3 नदियों के रूट बदलने से विवाद

1. गंडक नदी को नेपाल में नारायणी नदी के नाम से जाना जाता है. करीब 700KM लंबी यह नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल होते हुए गंगा में मिल जाती है. नेपाल और भारत के यूपी-बिहार के बीच यह नदी सीमा तय करती है. सुस्ता क्षेत्र में इसके मार्ग बदल जाने से कुछ जगहों पर सीमा विवाद है. भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक गंडक नदी के बहाव में परिवर्तन होने के कारण कुछ जगहों पर सीमा में बदलाव देखा गया है.

2. जमुनी नदी बिहार के मधुबनी जिले और नेपाल के बीच की सीमा को तय करती है. रतोपति मीडिया के मुताबिक कुछ सालों से इस नदी ने भी अपना मार्ग बदल लिया है, जिसके कारण इसके भराव वाले इलाकों में संबंधित पक्षों ने अपने-अपने हिसाब से अतिक्रमण कर लिया है.

3. नेपाली भूगोलवेत्ता बुद्धि नारायण श्रेष्ठ के मुताबिक रक्सौल और बीरगंज के बीच सिरसिया नदी बहती है. जब सुगौली समझौता हुआ था, तब नदी सीधी बहती थी, लेकिन अब नदी ने अपनी दिशा बदल ली है. इसके कारण नदी के किनारे वाले कुछ इलाकों पर नेपाल तो कुछ इलाकों पर भारत के किसानों ने कब्जा कर लिया है.

इन कारणों से भी दोनों के बीच विवाद

भारत और नेपाल के बीच महाकाली नदी के उद्गम स्थल को लेकर विवाद है. दरअसल, सुगौली संधि में कहा गया कि महाकाली नदी के पूर्व का क्षेत्र नेपाल का होगा, जबकि पश्चिम का क्षेत्र भारत का होगा. संधि में नदी के उद्गम स्थल का कोई जिक्र नहीं है. नेपाल का दावा है कि कालापानी का उद्गम स्थल लिम्पुधारा के पास है. वहीं भारत का कहना है कि काली नदी का उद्गम स्थल कालापानी के पास स्थित झरना है. इसके कारण इस इलाके की 332 वर्ग किलोमीटर पर नेपाल अपना दावा करता है.

विवाद का एक और कारण सीमा पार से कब्जे और ‘नो मैन्स लैंड’ पर अतिक्रमण भी है. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक हमने सीमा संबंधी मामलों के सभी पहलुओं से निपटने के लिए द्विपक्षीय तंत्र स्थापित किए हैं. संबंधित सभी पक्षों के लिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारत और नेपाल के बीच के जो भी द्विपक्षीय मामले है उसमें किसी भी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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