खैरागढ़ की सरकारी जमीन पर अवैध कॉलोनी का मामला गरमाया, जांच पूरी होने के बाद भी कार्रवाई अधर में

खैरागढ़ में सरकारी जमीन पर कथित अवैध प्लाटिंग और कॉलोनी निर्माण का मामला एक बार फिर चर्चा में है। शासन स्तर पर सख्ती के निर्देश, विभागीय जांच और रिपोर्ट तैयार होने के बावजूद अब तक किसी बड़ी कार्रवाई का अभाव सवाल खड़े कर रहा है। मामले में नजूल भूमि, एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क, छोटे झाड़ के जंगल और खसरा नंबर 167, 169 तथा 170 की भूमि शामिल बताई जा रही है।
जांच रिपोर्टों के बावजूद कार्रवाई नहीं
विभिन्न विभागों द्वारा की गई जांच में संबंधित भूमि पर कथित अवैध प्लाटिंग का उल्लेख सामने आया है। नगर एवं ग्राम निवेश विभाग ने भी अपनी रिपोर्ट और टिप्पणियां प्रस्तुत की हैं। वहीं कलेक्टर कार्यालय की नजूल शाखा द्वारा नगर पालिका को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसके बावजूद अब तक किसी बड़े अतिक्रमण हटाने अभियान, निर्माण ध्वस्तीकरण या एफआईआर दर्ज होने की सूचना नहीं मिली है।
भवन अनुमति और नियमों पर उठे सवाल
नगर पालिका द्वारा जारी भवन अनुज्ञा की शर्तों में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि कोई भूखंड अवैध प्लाटिंग का हिस्सा पाया जाता है तो उसकी अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जांच रिपोर्टों के बाद क्या संबंधित भूखंडों की अनुमति की समीक्षा की गई, क्या किसी भवन अनुज्ञा को निरस्त किया गया और क्या किसी निर्माण को अवैध घोषित किया गया। इन मुद्दों पर अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
प्रशासन के आश्वासन, जनता को कार्रवाई का इंतजार
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नगर पालिका को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं और जरूरत पड़ने पर मामले की समीक्षा की जाएगी। वहीं जिला प्रशासन ने दस्तावेजों और जांच रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई का संकेत दिया है। दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे मामलों में त्वरित कार्रवाई होती है, लेकिन करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन से जुड़े मामले में कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी है। अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है कि मामला केवल फाइलों तक सीमित रहेगा या जमीन पर भी कोई ठोस कार्रवाई दिखाई देगी।











