क्या होता है पंचामृत, जिसके बिना अधूरी है भगवान विष्णु की पूजा

धर्म शास्त्रों में भगवान श्रीहरि विष्णु को जगपालक यानी जगत का पालनहार करने वाला देवता बताया गया है. भगवान विष्णु ने संसार के कल्याण के लिए अनेक अवतार लिए हैं. भगवान को एकादशी का व्रत समर्पित किया गया है. धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से मृत्यु के बाद मोक्ष और वैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त होता है. भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना बहुत विशेष तरह की जाती है.
श्रीहरि विष्णु से जुड़ा कोई भी धार्मिक अनुष्ठान या पूजा का आयोजन उनको पंचामृत का भोग लगाए बिना पूरा नहीं होता. बिना पंचामृत के पूजा अपूर्ण मानी जाती है और उसका फल भी प्राप्त नहीं होता. पंचामृत का विशेष धार्मिक महत्व है. इसे भगवान विष्णु के सत्यनारायण से लेकर श्री कृष्ण अवतार की पूजा तक में भोग के रूप में चढ़ाए जाने की पंरपरा प्राचीन काल से चली आ रही है. आइए जानते हैं कि पंचामृत भोग क्या होता है?
पंचामृत क्या होता है और कैसे बनता है?
पंचामृत पांच चीजों का मिश्रण होता है. ये सभी पांच चीजें अति शुभ होती हैं और इनका खास धार्मिक महत्व धर्म शास्त्रों में बताया गया है. ये पांच चीजें हैं गाय का दूध, दही, गाय का घी, शहद और शक्कर. इन सभी चीजों को एक निश्चित मात्रा में मिलाकर भोग बनाया जाता है. फिर एक शुद्ध पात्र में रखकर भगवान को अर्पण किया जाता है. जब विष्णु जी और उनके अवतारों को पंचामृत का भोग अर्पित किया जाता है, तो इसमें तुलसी डाली जाती है.











