कटाई में जल्दबाजी पड़ सकती है भारी, सही समय पर फसल काटकर 15% तक नुकसान से बच सकते हैं किसान

खेती में अच्छी पैदावार के साथ फसल की समय पर कटाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कटाई में जल्दबाजी या अधिक देरी किसानों को 5 से 15 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा सकती है। फसल के सही समय पर कटने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर रहती हैं।

फसल पकने के संकेत पहचानना जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि जब धान की 80 से 85 प्रतिशत बालियां पीली या सुनहरी हो जाएं और पौधों की हरियाली लगभग समाप्त हो जाए, तब फसल कटाई के लिए तैयार मानी जाती है। किसान दाने को दांत से दबाकर भी इसकी जांच कर सकते हैं। यदि दाना कठोर है और आसानी से नहीं टूटता, तो कटाई शुरू की जा सकती है।

धान की कटाई जमीन से करीब 15 सेंटीमीटर ऊपर से करने की सलाह दी गई है। इससे भूसे की गुणवत्ता बेहतर रहती है और खेत में अवशेष बचने से मिट्टी की जैविक गुणवत्ता को भी फायदा मिलता है।

मौसम और नमी का रखें विशेष ध्यान

कृषि विभाग के अनुसार कटाई के समय धान के दानों में 18 से 22 प्रतिशत नमी आदर्श मानी जाती है। अधिक नमी होने पर भंडारण के दौरान फफूंद लगने का खतरा रहता है, जबकि अत्यधिक सूखे दाने कटाई और मिंजाई के दौरान टूट सकते हैं।

विशेषज्ञों ने किसानों को बेमौसम बारिश, तेज हवा और आंधी की संभावनाओं पर नजर रखने की सलाह दी है। मौसम में अचानक बदलाव से खड़ी फसल गिर सकती है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होते हैं।

कटाई के बाद इन उपायों से बढ़ेगा मुनाफा

किसानों को अनाज को दो से तीन दिन तक धूप में सुखाने, भंडारण से पहले नमी को 12 प्रतिशत से कम करने और टूटे या खराब दानों को अलग करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा साफ, सूखे और हवादार गोदाम में भंडारण करने तथा कीट और फफूंद से बचाव के लिए नियमित निरीक्षण करना जरूरी है।

किसानों का कहना है कि मशीनों से कटाई करने पर समय और मजदूरी दोनों की बचत होती है। आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह को अपनाकर किसान बिना अतिरिक्त लागत के अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
close
Virus-free.www.avast.com