दादी की लाडो ने छू लिया आसमान: NDA से पहली महिला फाइटर पायलट बनीं इशिता सांगवान, पूरा किया 12 साल पुराना वादा

यह कहानी नए भारत की उस बदलती तस्वीर की है जहां बेटियां अब सीमाओं की रक्षा के लिए आसमान को अपना ठिकाना बना रही हैं. साल 2021 में जब सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को एनडीए (NDA) परीक्षा में बैठने की ऐतिहासिक अनुमति दी, तब इशिता सांगवान 12वीं कक्षा में पढ़ रही थीं. उनके पिता चरण सिंह सांगवान ने उन्हें फोन पर इस फैसले की जानकारी दी. पिता की कही वह बात इशिता के दिल में उतर गई और उन्होंने उसी पल देश की सेवा के लिए फाइटर पायलट बनने की ठान ली. उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं के साथ ही जी-तोड़ मेहनत कर एनडीए की तैयारी शुरू की और लिखित परीक्षा, एसएसबी (SSB) इंटरव्यू, कड़े मेडिकल टेस्ट के साथ-साथ पायलट बनने के लिए सबसे जरूरी कंप्यूटरराइज्ड पायलट सिलेक्शन सिस्टम (CPSS) को पहली ही बार में क्रैक कर लिया.
इशिता के पिता के मुताबिक, वह बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा की धनी रही हैं. वे लगातार आठ-आठ घंटे तक पढ़ाई करने की क्षमता रखती थीं और हमेशा टॉपर रहीं. लेकिन उनकी जिंदगी सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं थी. इशिता एक बेहतरीन स्टेट लेवल बास्केटबॉल खिलाड़ी भी हैं. खेल के मैदान ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद मजबूत बनाया. बचपन में पेड़ों पर चढ़ना और हर चुनौती से टकरा जाना उनके पसंदीदा शौक थे, जिसने आगे चलकर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग में उनकी बहुत मदद की.
राजस्थान से गहरा नाता, शिक्षक माता-पिता की होनहार बेटी
इशिता का परिवार मूल रूप से हरियाणा के चरखी दादरी जिले के छप्पर गांव का रहने वाला है, लेकिन उनके पिता राजस्थान के झुंझुनूं में एक स्कूल के प्रिंसिपल हैं और मां अनीता सांगवान हिंदी की शिक्षिका हैं. इस वजह से इशिता की पढ़ाई-लिखाई राजस्थान के चूरू और नागौर जिलों में हुई. उनकी जुड़वां बहन आस्था सांगवान, जो इस समय एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई कर रही हैं, गर्व से कहती हैं कि इशिता उनसे महज दो मिनट बड़ी हैं लेकिन हमेशा से उनकी रोल मॉडल रही हैं. आस्था के मुताबिक, वह हमेशा से कुछ लीक से हटकर और असाधारण करना चाहती थी.
दादी को दिया वो वादा जो बन गया हकीकत
इशिता की इस कामयाबी के पीछे एक बेहद भावुक कहानी भी छिपी है. लगभग 12 साल पहले उनकी दादी लिछमा देवी का निधन हो गया था. इशिता अपनी दादी के बेहद करीब थीं और बचपन में अक्सर उनसे वादा करती थीं कि वह बड़ी होकर सेना में एक बड़ी अधिकारी बनेंगी. आज जब इशिता ने फाइटर पायलट बनकर इतिहास रच दिया है, तो भले ही उनकी दादी इस पल को देखने के लिए दुनिया में नहीं हैं, लेकिन पूरे परिवार का मानना है कि दादी का आशीर्वाद हर कदम पर इशिता के साथ था.
महिला सशक्तिकरण का नया आसमान
खडकवासला (पुणे) में तीन साल की कड़ी सैन्य ट्रेनिंग और फिर डुंडीगल (हैदराबाद) स्थित एयर फोर्स एकेडमी में फाइटर जेट उड़ाने की कठिन विंग ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 13 जून 2026 को इशिता वायुसेना का हिस्सा बन गईं. वे अब कॉम्बैट एविएशन (युद्धक विमानन) के क्षेत्र में रूढ़ियों को तोड़ते हुए देश की लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बन चुकी हैं.











