30 महीने में मंदिरों पर बरसी ‘लक्ष्मी’, चढ़ावे से हिमाचल को मिले 420 करोड़ से ज्यादा

हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में एक विधायक के द्वारा पूछे गए सवाल पर हिमाचल के डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश के मंदिरों में पिछले करीब ढाई वर्षों में 4 अरब 19 करोड़ 88 लाख 37 हजार 451 रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ है. मंदिरों की दान राशि का आंकड़ा 419 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है.
उन्होंने कहा कि 1 अगस्त 2026 तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं ने नकद राशि के साथ सोना-चांदी और अन्य रूपों में भी बड़ी मात्रा में चढ़ावा अर्पित किया है.
हिमाचल के प्रमुख शक्तिपीठों और धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं की भारी आस्था है. चढ़ावे के मामले में श्री बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध, माता चिंतपूर्णी मंदिर ऊना, श्री महामाया बाला सुंदरी मंदिर त्रिलोकपुर, श्री नैना देवी मंदिर बिलासपुर, श्री ज्वालामुखी मंदिर और बज्रेश्वरी देवी मंदिर कांगड़ा प्रमुख मंदिरों में शामिल हैं.
मंदिरों में करोड़ों का चढ़ावा
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के 36 बड़े मंदिरों में श्रद्धालुओं की ओर से करीब सवा चार सौ करोड़ रुपये का चढ़ावा दिया गया है.
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य के सरकारी नियंत्रण वाले 36 प्रमुख मंदिरों में कुल 419.88 करोड़ रुपये (लगभग 420 करोड़) का चढ़ावा 1 जनवरी 2024 से 1 अगस्त 2026 की अवधि के दौरान प्राप्त हुआ है.
इस सूची में हमीरपुर स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध लगभग ₹99.19 करोड़ के साथ पहले स्थान पर रहा है. इसके बाद श्री नयना देवी मंदिर (₹86.94 करोड़) और श्री ज्वालामुखी मंदिर (₹36.57 करोड़) का स्थान रहा. हिमाचल प्रदेश सरकार के अनुसार इस धन का उपयोग मंदिरों के रखरखाव, सौंदर्यीकरण, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, गौशालाओं (गौसदन) के संचालन और मंदिर कर्मचारियों व पुजारियों के वेतन के लिए किया जाता है.
सभी मंदिरों को नई गाइडलाइन जारी
मंदिरों में आने वाले इस चढ़ावे के रखरखाव, गिनती और निगरानी को लेकर सरकार की और से भी पारदर्शी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं.
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राम मंदिर में चंदा चोरी के प्रकरण के बाद प्रदेश सरकार ने मंदिरों में चढ़ावे की गिनती और उसकी निगरानी को लेकर विशेष निर्देश जारी किए हैं. अब चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया को सर्विलांस के दायरे में लाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी तरह की अनियमितता की संभावना को कम किया जा सके.
इसके लिए प्रदेश के सभी मंदिरों को नई गाइडलाइन जारी की गई है. गाइडलाइन के तहत मंदिरों में चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़ी प्रक्रिया पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं.











