Nepal floods- नेपाल बाढ़ में बचाए गए 21 भारतीय दिल्ली पहुंच गए
विदेशी मंत्री ने बताया कि ‘एक जगह पर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट है, वहां एक टनल में लोगों के फंसे होने की संभावना हो सकती है. इसलिए हम विशेषज्ञों के साथ एक टीम भेज रहे हैं.

Nepal floods।नेपाल में बुधवार को आई भयंकर बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. इस बाढ़ में सैकड़ों लोग बह गए, जिनमें से कुछ को बचा लिया गया तो कुछ अभी भी लापता हैं. इस बाढ़ ने बड़ी संख्या में भारतीयों को भी नुकसान पहुंचाया है, जो नेपाल घूमने या फिर किसी और काम से गए थे.
इस बीच विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह जानकारी दी है कि बाढ़ से प्रभावित इलाके से कल काठमांडू पहुंचे 21 भारतीय नागरिक आज दिल्ली पहुंच गए हैं. ये 21 भारतीय नागरिक तमिलनाडु से हैं और वो इंडिगो की फ्लाइट से आए हैं.
रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बताया, ‘इन 21 भारतीय नागरिकों के अलावा कल हमने आपको उन 63 भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी दी थी, जो त्रिशूली वन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे.
उन्हें भी कल सुरक्षित निकाल लिया गया था. इन 21 और 63 लोगों के अलावा हमें पता चला है कि चीन की तरफ फंसे 96 भारतीय नागरिक जमीन के रास्ते सुरक्षित नेपाल पहुंच गए हैं. उन्हें वहां से निकालने की कोशिशें जारी हैं’.
उन्होंने आगे कहा, ‘जहां तक उन लोगों की संख्या का सवाल है, जिनसे हम संपर्क नहीं कर पा रहे हैं या जो लापता हैं, तो इस समय यह संख्या 320 है. हमें कई सूचियों का मिलान करना है, जिन पर हम काम कर रहे हैं. भारतीय मूल के लगभग 100 ऐसे लोग भी हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. ये भारतीय मूल के लोग हैं, जो शायद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए होंगे, लेकिन उनके पास दूसरी नागरिकता है. हमारा विदेश मंत्रालय का कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे काम कर रहा है और ऐसा ही काठमांडू और बीजिंग में हमारे दूतावासों के कंट्रोल रूम में भी हो रहा है’.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि ‘चीन की तरफ हमारे 400 भारतीय नागरिक हैं. वो सुरक्षित हैं. वो अपने परिवारों के संपर्क में हैं, क्योंकि मुझे बताया गया है कि उस तरफ फोन वगैरह काम कर रहे हैं. हमारा दूतावास उनमें से कई लोगों के संपर्क में है, बल्कि उनके टीम लीडरों और ट्रैवल एजेंटों के भी संपर्क में है’.
वहीं, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी है कि वो उन भारतीयों के एक ग्रुप से मिले, जो कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए थे. बाढ़ के बाद उन्हें बचा लिया गया और काठमांडू लाया गया. उन्होंने बताया कि नेपाली सेना ने उन्हें बचाया और हमारी एंबेसी ने उनकी वापसी का इंतजाम किया. उन्होंने यह भी बताया कि 315 से ज्यादा भारतीयों से अभी भी संपर्क नहीं हो पाया है. लगभग 85 भारतीयों को अलग-अलग जगहों से बचाया गया है, जिसमें 21 लोगों का यह ग्रुप भी शामिल है, जो अभी-अभी आया है.
विदेशी मंत्री ने बताया कि ‘एक जगह पर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट है, वहां एक टनल में लोगों के फंसे होने की संभावना हो सकती है. इसलिए हम विशेषज्ञों के साथ एक टीम भेज रहे हैं.
साथ ही उन्हें कुछ बेली ब्रिजों की जरूरत है, इसलिए हम पुल भेज रहे हैं. कुछ मेडिकल टीमें भी वहां जा सकती हैं. अगर उन्हें NDRF की जरूरत होगी, तो हम उन्हें भेजेंगे. राहत सामग्री लेकर दो विमान पहले ही जा चुके हैं, तीसरा विमान आज उड़ान भरेगा’.











