बदलते दौर के साथ बदली जिम्मेदारी…क्यों आज भी जरूरी हैं शिक्षक?

क्लास 7th की अनाया को खूब सारा होमवर्क मिला था. मम्मी पापा ऑफिस में थे, अनाया ने एआई को काम पर लगाया और कुछ सेकंड में हो गया. वो सारा होमवर्क जिसके लिए शायद उसे बड़ी मेहनत करनी पड़ती. आजकल स्टूडेंट्स को कोई कॉन्सेप्ट समझना हो तो झट से एआई से पूछते हैं और एआई भी कई उदाहरण के साथ बात क्लीयर कर देता है. करियर की कन्फ्यूजन का हल भी एआई के पास है. एआई के इस दौर में टीचर की क्या अहमियत है सवाल जरूर हो सकता है, लेकिन जवाब भी इसी बदलते सिस्टम में छिपा है. एआई के पास जवाब हो सकते हैं, लेकिन किस जवाब पर भरोसा करना है, कौनसा सवाल पूछना है और सही रास्ता कौनसा है, ये अब भी शिक्षक की जिम्मेदारी है.
शिक्षक एआई का भी गुरु है?
क्लासरूम में अब सिर्फ ब्लैकबोर्ड नहीं बदल रहा, टीचर का काम भी बदल रहा है. गूगल ने सितंबर में देशभर के स्कूल और हायर एजुकेशन शिक्षकों के लिए एआई ट्रेनिंग सेशंस शुरू किए हैं. हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं में हो रही इन ट्रेनिंग्स का मकसद शिक्षकों को एआई टूल्स के इस्तेमाल के लिए तैयार करना और उनका रूटीन काम आसान बनाना है, ताकि वो बच्चों को समझने और उनकी मेंटरिंग के लिए ज्यादा समय दे सकें.
सीबीएसई भी 2026-27 से क्लास 3th से 8th तक कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नया सिलेबस शुरू कर चुका है. इसमें एआई के इस्तेमाल के साथ लॉजिकल थिंकिंग, प्रॉब्लम सॉल्विंग, पैटर्न पहचान, डिजिटल लिटरेसी और टेक्नोलॉजी को अहमियत दी गई है. यानी एआई टीचर को रिप्लेस करने नहीं, उन्हें और पॉवरफुल बनाने आ रहा है.
जवाब एआई के पास तो शिक्षक की जरूरत क्यों?
कभी बच्चे की दुनिया में हर मुश्किल सवाल का जवाब टीचर के पास होता था. आज वो बच्चे गूगल करते हैं, वीडियो देखते हैं, एआई से जवाब लेते हैं. किसी भी कॉन्सेप्ट को एआई कई एक्जाम्पल्स के साथ समझा देता हैं. एसाइन्मेंट और होमवर्क में भी मदद कर सकता है.
लेकिन एजुकेशन सिर्फ इन्फॉर्मेशन नहीं है. शिक्षा मंत्रालय का डिजिटल डेटाबेस रखने वाली यूडीआईएसई यानि यूनिफ़ाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फ़ॉर एजुकेशन 2023-24 के आंकड़े बताते हैं कि देश में करीब 14.72 लाख स्कूल, 24.8 करोड़ विद्यार्थी और 98 लाख शिक्षक हैं. इतने बड़े एजुकेशन सिस्टम में शिक्षक का काम सिर्फ चैप्टर पढ़ाना नहीं है. वो कभी टीचर बनके कॉन्सेप्ट समझाते हैं, कभी गुरु बनके सोचने का तरीका सिखाते हैं, कभी मेंटोर के जैसे करियर और लाइफ में रास्ता दिखाते हैं और डिजिटल एरा में कभी कंटेंट क्रिएटर बनकर क्लासरूम से बाहर हजारों बच्चों तक पहुंच रहे हैं.
इन्फॉरमेशन की कमी नहीं, ऑप्शन्स की भरमार
इंजीनियरिंग या मेडिकल? सरकारी नौकरी या स्टार्टअप? इंडिया या अब्रॉड? सोशल मीडिया या कुछ और? सरदार पटेल विद्यालय की प्रिंसिपल अनुराधा जोशी कहती हैं, दुनिया का कोई बच्चा बेकार नहीं है. हर बच्चे में कोई न कोई खूबी रहती ही है. हर बच्चे को ऐसा टीचर चाहिए, जो उसमें विश्वास करे. अच्छा शिक्षक बच्चे की नजर से चीजों को समझता है और फिर एक एडल्ट की तरह सही दिशा देता है.
गुरु-शिष्य से टीचर-स्टूडेंट तक कितना बदल गया रिश्ता?
गुरु-शिष्य परंपरा में रिश्ता सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं था. बड़े क्लासरूम, 40-40 बच्चों के सेक्शन, बढ़ता सिलेबस और पैरेंट्स की बढ़ती एक्सपेक्टेशन ने भी इस रिश्ते को बदला है. आईसीएचआर के डायरेक्टर ओमजी उपाध्याय कहते हैं कि गुरु-शिष्य और टीचर-स्टूडेंट में बड़ा अंतर है. गुरु का अर्थ ही है जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए. आज टीचर और स्टूडेंट के बीच पहले जैसा व्यक्तिगत बॉन्ड कम हुआ है और रिश्ता ज्यादा प्रोफेशनल होता जा रहा है, लेकिन इसका मतलब पुरानी सख्ती वापस आए ऐसा नहीं है. अनुराधा जोशी कहती हैं कि अच्छे टीचर के लिए बच्चे के साथ तार जोड़ना और रिश्ता बनाना सबसे जरूरी है. रिश्तों में सादगी, ईमानदारी और निष्ठा आज भी सबसे बड़ा मंत्र है.
टीचर अकेले नहीं, पैरेंट भी जिम्मेदार
आज पैरेंट्स चाहते हैं कि स्कूल पढ़ाई के साथ बच्चे के बिहेवियर और फ्यूचर की भी जिम्मेदारी लें, लेकिन बच्चे की रिस्पॉन्सिबिलिटी सिर्फ स्कूल की कैसे हो सकती है? ओमजी उपाध्याय कहते हैं कि बच्चा स्कूल में करीब छह घंटे रहता है, लेकिन बाकी समय परिवार के साथ इसलिए पैरेंट्स और टीचर दोनों की समान जिम्मेदारी है. अनुराधा जोशी भी मानती हैं कि टीचर बच्चे को सीखने के मौके देते है, लेकिन सीखना बच्चे के भीतर से आता है. इसे फोर्स नहीं किया जा सकता. यानी टीचर का रोल स्टूडेंट को डराने से ज्यादा उसे समझने की है. कम नंबर पर और मेहनत के लिए कहने के बजाय यह समझना कि दिक्कत कॉन्सेप्ट में है, कॉन्फिडेंस में या सीखने के तरीके में.
एआई असिस्टेंट हो सकता है, गुरु नहीं
भारत में एक ओर एआई और स्मार्ट क्लास का फ्यूचर तैयार हो रहा है, लेकिन दूसरी तस्वीर ये है कि यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फ़ॉर एजुकेशन बताता है कि देश में 1,10,971 सिंगल-टीचर स्कूल हैं, जहां एक शिक्षक ही कई रोल निभाता है. इसलिए फ्यूचर टीचर की कहानी सिर्फ एआई और स्मार्ट बोर्ड की कहानी नहीं है. उस शिक्षक, उस मेंटोर, उस गुरू की भी कहानी है जो लिमिटेड रिसोर्सेस में भी स्टूडेंट को सीखने की वजह देता है. यही एआई एरा में गुरु का नया औरा है.











