सड़क हादसे के बाद रचा गया 27 लाख का प्लान जांच में खुली बीमा फर्जीवाड़े की परतें

इटावा : जिले में बीमा फर्जीवाड़े का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां दो अलग-अलग सड़क हादसों में मृतकों के परिजनों द्वारा लाखों रुपये का मुआवजा लेने की कोशिश की गई. जांच में दोनों मामलों में प्रस्तुत बीमा पॉलिसियां पूरी तरह फर्जी पाई गईं.अदालत के आदेश पर वाहन मालिकों और शोरूम से जुड़े लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.

जानकारी के मुताबिक, दोनों मामलों में Magma HDI General Insurance के नाम पर फर्जी बीमा पॉलिसियां तैयार कर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में कुल 27 लाख 10 हजार रुपये का दावा किया गया था.
पहला मामला: बकेवर थाना क्षेत्र का
पहला मामला थाना बकेवर क्षेत्र के उजियानी हाईवे का है.यहां मोपेड से हुए सड़क हादसे में अनिल कुमार की मौत हो गई थी.हादसे के बाद उनकी पत्नी ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में 13 लाख 80 हजार रुपये का दावा दाखिल किया और बीमा पॉलिसी व बॉन्ड अदालत में जमा किए.

जब अदालत के निर्देश पर दस्तावेजों का सत्यापन बीमा कंपनी से कराया गया, तो पॉलिसी फर्जी निकली। जांच में यह भी सामने आया कि यह पॉलिसी वाहन खरीदते समय जिया मोटर्स शोरूम के माध्यम से तैयार की गई थी.मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीजेएम फोर्थ कोर्ट के न्यायाधीश सर्वेश कुमार यादव ने पुलिस को मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई के आदेश दिए.
दूसरा मामला: लवेदी थाना क्षेत्र
दूसरा मामला थाना लवेदी क्षेत्र का है.यहां हाईवे पर मोटरसाइकिल दुर्घटना में नीरज तिवारी की मौत हो गई थी.उनके भाई की ओर से अदालत में 13 लाख 30 हजार रुपये का मुआवजा क्लेम दाखिल किया गया और बीमा पॉलिसी प्रस्तुत की गई.

कंपनी द्वारा कराई गई जांच में यह पॉलिसी भी फर्जी पाई गई। इसके बाद अदालत के आदेश पर कंपनी के जांच अधिकारी भंवर सिंह राजावत ने संबंधित थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई.
किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस ने दोनों मामलों में बीएनएस की धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3) और 340(2) के तहत अभियोग पंजीकृत कर लिया है। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
अधिवक्ता का बयान
बीमा कंपनी के अधिवक्ता राजीव कुमार चौधरी ने बताया कि अदालत में पेश की गई दोनों बीमा पॉलिसियां जांच में पूरी तरह फर्जी पाई गई हैं.उन्होंने कहा कि इस तरह के फर्जीवाड़े से बीमा व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई बेहद जरूरी है.

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