कैंसर के इलाज में AIIMS भोपाल की नई पहल, मरीजों को अब नहीं जाना पड़ेगा दिल्ली-मुंबई! शुरू होगी पेट-सीटी स्कैन सुविधा

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) प्रबंधन ने कैंसर पीड़ितों के लिए एक बड़ी सौगात की तैयारी पूरी कर ली है। संस्थान में जल्द ही पेट-सीटी स्कैन (PET-CT Scan) की सुविधा शुरू होने जा रही है। वर्तमान में सरकारी क्षेत्र में इस मशीन की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर 15 से 25 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।
क्यों अनिवार्य है पेट-सीटी स्कैन?
कैंसर के इलाज में पेट-सीटी स्कैन को सामान्य सीटी स्कैन या एमआरआई से कहीं अधिक उन्नत माना जाता है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
सटीक पहचान: यह तकनीक न केवल शरीर में कैंसर की गांठ का पता लगाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि कैंसर शरीर के अन्य किन हिस्सों में फैल चुका है।
उपचार का निर्धारण: इसके परिणामों के आधार पर ही डॉक्टर यह तय कर पाते हैं कि मरीज को कीमोथेरेपी, रेडिएशन या सर्जरी में से किस उपचार की प्राथमिकता देनी है।
रिकवरी की निगरानी: इलाज के दौरान कैंसर की स्थिति में कितना सुधार हुआ है, इसकी रीयल-टाइम जानकारी भी इसी स्कैन के जरिए प्राप्त होती है।
बिल्डिंग तैयार, दिल्ली से टीम का इंतजार
एम्स अधिकारियों के मुताबिक, इस सुविधा के लिए विशेष बिल्डिंग का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। चूंकि पेट-सीटी मशीन से रेडिएशन का स्तर बहुत अधिक होता है, इसलिए सुरक्षा मानकों के कड़े पालन की आवश्यकता होती है। इसी सिलसिले में दिल्ली से एक विशेषज्ञ कमेटी जल्द ही भोपाल आएगी। यह टीम बिल्डिंग की संरचना और रेडिएशन सुरक्षा मानकों की समीक्षा कर अंतिम गाइडलाइन तैयार करेगी।
मरीजों को होने वाले लाभ
संस्थान का लक्ष्य है कि जून 2026 तक सभी औपचारिकताएं पूरी कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। इससे होने वाले फायदे निम्नलिखित हैं:
आर्थिक बचत: निजी सेंटरों की तुलना में बेहद कम खर्च पर जांच संभव होगी।
महानगरों की दौड़ से मुक्ति: अब सस्ते इलाज के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
सूक्ष्म जांच: यह शरीर की कोशिकाओं में होने वाले अत्यंत सूक्ष्म बदलावों को भी पकड़ने में सक्षम है।
इस सुविधा के प्रारंभ होने से मध्य प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के मरीजों को भी उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ होंगी।











