सरगुजा में वनभूमि पर कब्जे के आरोप, सूरजपुर के कॉलेज में सियासी संग्राम; दो मामलों से मचा हड़कंप

सरगुजा/सूरजपुर: एक ओर जंगल की जमीन को लेकर बड़ा आरोप, तो दूसरी ओर महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव पर सियासी तकरा, दो अलग-अलग घटनाओं ने प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

खालिबा में वनभूमि विवाद, रेंजर–बीट गार्ड पर गंभीर आरोप

सरगुजा वन मंडल के अंतर्गत खालिबा गांव में ग्रामीणों ने वन परिक्षेत्र अंबिकापुर में पदस्थ रेंजर राजेश सिंह और बीट गार्ड महेंद्र उरांव पर लगभग 20 एकड़ वनभूमि को कथित रूप से छोड़कर अवैध कब्जा कराने का आरोप लगाया है. ग्रामीणों का दावा है कि पुरानी सीपीटी (कंटूर ट्रेंच) गड्ढों की खुदाई निर्धारित स्थल पर न कर दूसरी जगह कराई गई, जबकि छोड़ी गई भूमि पर अवैध कब्जे की तैयारी की जा रही थी.

आरोप यह भी है कि गांव के निस्तार और आवागमन का पारंपरिक रास्ता बंद कर दिया गया. जब ग्रामीणों ने विरोध किया तो कथित रूप से उन्हें धमकाया गया. बढ़ते आक्रोश के बीच सैकड़ों महिला-पुरुष अधिवक्ता डॉ. डी. के. सोनी के नेतृत्व में मुख्य वन संरक्षक से मिले और ज्ञापन सौंपा.

मामले को गंभीर मानते हुए मुख्य वन संरक्षक दिलराज प्रभाकर ने तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि विभागीय मिलीभगत पाई गई तो सख्त कार्रवाई होगी. गांव की महिलाओं ने दो टूक कहा—“जंगल ही जीवन है, इसे बचाने की लड़ाई जारी रहेगी.”

सिलफिली महाविद्यालय में वार्षिक उत्सव पर सियासी गरमाहट

इधर सूरजपुर जिले के सिलफिली महाविद्यालय में वार्षिक उत्सव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. छात्र संगठन एनएसयूआई ने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम में एक ही राजनीतिक विचारधारा से जुड़े लोगों को प्राथमिकता देकर आमंत्रित किया गया. ब्लॉक अध्यक्ष यश दास ने सहायक प्राध्यापक डॉ. अजय कुमार तिवारी पर एकपक्षीय निर्णय का आरोप लगाते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की तटस्थता प्रभावित नहीं होनी चाहिए. संगठन ने संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के कुलपति राजेंद्र लखपाले के नाम ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है.

दोनों घटनाओं ने अलग-अलग क्षेत्रों में हलचल मचा दी है. एक तरफ जंगल बचाने की जंग है, तो दूसरी ओर शिक्षा परिसर की निष्पक्षता पर सवाल. अब निगाहें प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं- क्या सच्चाई सामने आएगी या सवाल यूं ही गूंजते रहेंगे?

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