भाजपा के दो जिलाध्यक्षों की बातचीत का ऑडियो वायरल, नाश्ते के खर्च को लेकर बढ़ा विवाद

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में भाजपा के दो जिलाध्यक्षों के बीच कथित फोन पर हुई बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। वायरल ऑडियो में पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान नाश्ता, पानी और स्वागत व्यवस्था के खर्च को लेकर दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस सुनाई दे रही है। ऑडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने भाजपा पर निशाना साधा है, जबकि भाजपा ने इसे संगठन की सामान्य बातचीत बताया है।
कथित ऑडियो में खर्च को लेकर हुई बहस
वायरल ऑडियो में भाजपा जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन और भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष खगेश कोसरिया के बीच कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा सुनाई देती है। बातचीत में पुरुषोत्तम देवांगन ने बाहर से आने वाले अतिथियों के लिए बेहतर नाश्ता, पानी और स्वागत व्यवस्था पर जोर दिया।
वहीं खगेश कोसरिया ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि वे सीमित संसाधनों में कार्यक्रम आयोजित करना चाहते हैं। उन्होंने समोसा, जलेबी, चाय और पानी जैसी सामान्य व्यवस्था करने की बात कही और कहा कि वे अपनी क्षमता से अधिक खर्च नहीं उठा सकते। कथित बातचीत के दौरान संगठन चलाने और आवश्यकता पड़ने पर इस्तीफा देने तक की बात भी सामने आई।
कांग्रेस का हमला, भाजपा का जवाब
वायरल ऑडियो को कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते हुए भाजपा पर तंज कसा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि महंगाई और जनता के मुद्दों के बजाय भाजपा अपने आंतरिक कार्यक्रमों और नाश्ते की व्यवस्था को लेकर विवाद में उलझी हुई है। पार्टी ने इसे “समोसे पर संग्राम” करार देते हुए भाजपा की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
वहीं भाजपा जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन ने कहा कि कांग्रेस के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए संगठन के अंदर की सामान्य बातचीत को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि इससे जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष खगेश कोसरिया की ओर से इस पूरे विवाद पर अब तक कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। जानकारी के अनुसार, उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
फिलहाल वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि इसके सार्वजनिक होने के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।











