रीवा आईजी का बड़ा एक्शन: खाकी के पीछे छिपे ‘लूट तंत्र’ का पर्दाफाश; मनगवां टीआई सहित तीन पुलिस कर्मी सस्पेंड

रीवा: पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और मनमानी की जड़ें खोदने के लिए आईजी गौरव राजपूत और जिले के आला अधिकारियों ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की आड़ में ‘अवैध वसूली का खेल’ करने वाले मनगवां थाने के कार्यवाहक निरीक्षक गजेन्द्र सिंह धाकड़ और उनके दो साथी आरक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

सूत्रों और स्थानीय शिकायतों के अनुसार, मनगवां थाने में पिछले कुछ समय से खाकी की आड़ में वसूली का गिरोह सक्रिय था. आरोप है कि एनडीपीएस एक्ट की कार्रवाई के दौरान ये पुलिसकर्मी आरोपियों या संदिग्धों से सांठगांठ कर मोटी रकम की डिमांड करते थे. मामला तब गरमाया जब आईजी और पुलिस कप्तान तक इस ‘लूट’ की पुख्ता खबरें पहुँचीं.

सोशल मीडिया और स्थानीय हलकों में गजेन्द्र सिंह धाकड़ के कार्यकाल को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. उन पर आरोप हैं कि:
जातिगत भेदभाव: मुकदमों में न्याय की जगह ‘जाति’ देखकर कार्रवाई की जाती थी.

संरक्षण का खेल: चर्चा है कि धाकड़ को कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त था, जिसके दम पर वह आम जनता के साथ लूटपाट और अभद्रता करता था.

फर्जी मुकदमे: कई निर्दोष लोगों को फंसाने और वायरल खबरों के माध्यम से छवि खराब करने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं.

इस कार्रवाई के बाद जिला पंचायत सदस्य लालमणि त्रिपाठी और अन्य जागरूक नागरिकों ने रीवा पुलिस प्रशासन से एक विशेष मांग की है. उनकी मांग है कि “निलंबन ही काफी नहीं है, गजेन्द्र सिंह धाकड़ के पूरे कार्यकाल के दौरान दर्ज किए गए समस्त प्रकरणों की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. यह पता लगाया जाना चाहिए कि कितने निर्दोषों को डरा-धमका कर लूटा गया और कितने अपराधियों को सांठगांठ कर छोड़ा गया.

आईजी गौरव राजपूत की इस कार्रवाई ने महकमे में हड़कंप मचा दिया है. यह स्पष्ट संदेश है कि वर्दी की आड़ में अपराध करने वालों के लिए रीवा पुलिस में कोई जगह नहीं है. वर्तमान में तीनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर लाइन अटैच किया गया है और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है.

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