पाकिस्तान से पीस डील के बीच बड़ा झटका, ईरानी नेता पर अमेरिका की स्ट्राइक

ईरान के जिस नेता से पाकिस्तान शांति समझौते को लेकर बातचीत कर रहा था, उसी पर अमेरिका और इजराइल ने स्ट्राइक कर दी है. ईरान के इस नेता का नाम है- कमाल खराजी. खराजी पूर्व में ईरान के विदेश मंत्री रह चुके हैं. वर्तमान में शांति समझौते के लिए पाकिस्तान उन्हीं के संपर्क में था. पाकिस्तान की तरफ से सभी संदेश खराजी को ही भेजे जा रहे थे. अमेरिका और इजराइल के स्ट्राइक में खराजी बुरी तरह घायल हो चुके हैं.

ईरानी समाचार पत्र मिहान के अनुसार बुधवार (1 अप्रैल) को तेहरान के अजौरानियेह इलाके में खराजी के घर पर हमला हुआ. इस हमले में खराजी बुरी तरह घायल हो गए. उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

कौन हैं कमाल खराजी?
81 साल के कमाल खराजी को ईरान का मशहूर कूटनीतिज्ञ माना जाता है. खराजी 1997 से 2005 तक ईरान के विदेश मंत्री रहे. विदेश मंत्री पद से जब उनकी रुखसती हुई तो वे सुप्रीम लीडर कार्यालय से जुड़ गए. खराजी को ईरान के दूसरे सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का करीबी माना जाता था.

खराजी इस वक्त मोज्तबा खामेनेई के विदेश सलाहकार भी हैं. यही वजह है कि पाकिस्तान अपना संदेश खराजी को भेज रहा था. ईरान में जन्मे खराजी की पढ़ाई-लिखाई अमेरिका में हुई थी. उन्होंने 1975 में ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की थी.

खराजी पर अटैक क्यों?
81 साल के खराजी ईरान की तरफ से शांति समझौता कराने में सक्रिय थे. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उन पर हमला क्यों किया गया है? इजराइल ने खराजी पर अटैक को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया है. हमला ऐसे वक्त में किया गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को पाषाण काल में भेज देने की धमकी दी.

ट्रंप ने कहा कि युद्ध जारी रहने वाला है. हम आखिरी में बमबारी के जरिए ईरान को पाषाण काल में भेज देंगे. वहीं ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामनेई ने भी लक्ष्य हासिल होने तक जंग जारी रहने की घोषणा की है.

समझौते का प्रयास कहां तक पहुंचा?
ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते का प्रयास चीन, तुर्की, पाकिस्तान और मिस्र के साथ मिलकर सऊदी करा रहा है. अमेरिका की तरफ से डील को खुद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं. पाकिस्तान इस मामले में संदेशवाहक है. चीन ने 5 सूत्री प्लान अमेरिका को दिया है, जिसके तहत युद्धविराम की बात कही गई है. इनमें होर्मुज को खोलने और ईरान पर हमला न करने की बात प्रमुख हैं.

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