बंगाल चुनाव से पहले घोषणापत्र की जंग, भाजपा और टीएमसी ने तेज की रणनीति

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल गर्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने ‘पीपुल्स मेनिफेस्टो’ के जरिए जनता के बीच बड़ा दांव खेलने की तैयारी की है। पार्टी का दावा है कि इस बार घोषणापत्र शीर्ष नेतृत्व की बजाय सीधे जनता की राय के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसके लिए राज्यभर में सुझाव अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें गांव और शहरों से लोगों की समस्याएं और अपेक्षाएं एकत्र की जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, लोगों से प्राप्त सुझावों में कट मनी और भ्रष्टाचार पर सख्ती, कानून-व्यवस्था में सुधार, रोजगार सृजन, भयमुक्त समाज का निर्माण, सिंडिकेट राज पर रोक, बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के प्रत्यक्ष लाभ योजनाएं और युवाओं के पलायन को रोकने जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। पार्टी इन बिंदुओं को घोषणापत्र में शामिल करने की तैयारी में है।
भाजपा इस बार क्षेत्रीय रणनीति पर भी विशेष ध्यान दे रही है। उत्तर बंगाल के आठ जिलों के लिए अलग मिनी घोषणापत्र तैयार किए जाने की बात सामने आई है। इसमें हर साल 20 लाख नौकरियां देने का वादा, उत्तर बंगाल में आईआईटी की स्थापना और युवाओं को 25 हजार रुपये तक की सशर्त आर्थिक सहायता जैसे प्रस्तावों पर चर्चा है। पार्टी का कहना है कि यह संकल्प पत्र आम जनता की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करेगा।
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा की इस पहल को चुनावी जुमला करार दिया है। पार्टी का कहना है कि उसकी सरकार पहले से ही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से युवाओं और जरूरतमंदों को सीधी आर्थिक मदद दे रही है। तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि उसकी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंच रहा है और यही उसका मजबूत मॉडल है।
राज्य की सियासत अब दो अलग-अलग मॉडलों की टक्कर के रूप में देखी जा रही है। एक तरफ भाजपा जनता की भागीदारी पर आधारित घोषणापत्र का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस अपनी मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं को उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। चुनाव से पहले सुरक्षा, रोजगार और प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं।









