Brahma Patra: नागा साधुओं की पहचान होता है ब्रह्म पात्र, अगर यह टूट जाए तो क्या होता है?

Naga Sadhu Brahma Patra: नागा साधु देवों के देव महादेव के उपासक होते हैं. नागा साधुओं की जिवनशैली बड़ी रहस्यमयी होती है. नागा अपनी कठोर तपस्या के लिए जाने जाते हैं. नागा आम तौर पर कुंभ और महाकुंभ जैसे आयोजनों में नजर आते हैं. नागा साधु भौतिक सुख-सुविधाओं का पूर्ण त्याग कर देते हैं. उनके पास संपत्ति के नाम पर सबसे मूल्यवान चीज होती है उनका ‘ब्रह्म पात्र’. इसे आम बोलचाल की भाषा में तुंबा कहते हैं.

ब्रह्म पात्र कोई साधारण बर्तन नहीं, बल्कि एक संन्यासी के लिए उसके अस्तित्व का अनिवार्य हिस्सा और ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है. नागा साधु इसे ब्रह्मांड का प्रतीक मानते हैं. इसके बिना नागा साधुओं की तपस्या पूर्ण नहीं होती है, लेकिन क्या आपको पता है नागा साधु इसका क्या उपयोग करते हैं. अगर ये टूट जाए तो फिर क्या होता है? आइए सब विस्तार से जानते हैं.

ब्रह्मा जी ने बनाया था ब्रह्म पात्र

पौराणिक मान्यता है कि ये पात्र स्वयं ब्रह्मा जी ने निर्मित किया था. संन्यासी मानते हैं कि ये तुंबा ब्रह्मांड का एक सूक्ष्म स्वरूप है. जिस तरह से ब्रह्मा जी ने संपूर्ण संसार को धारण कर रखा है, वैसे ही ये पात्र जीवन देने वाले जल और अन्न को धारण करता है. यह पात्र विशेष रूप से सूखी हुई लौकी या तुंबा से बनाया जाता है. ये कड़वा होता है, ताकि कोई जानवर या पशु इसे न खा सके.

नागा साधु इसी पात्र का उपयोग भिक्षा मांगने, भोजन करने और पानी पीने के लिए करते हैं. यह उनके लिए एक साथी की तरह है जो जीवनभर साथ रहता है. ब्रह्म पात्र का महत्व धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी है. इसमें रखा जल प्राकृतिक रूप से शुद्ध रहता है. यह पात्र बहुत हल्का होता है और कभी डूबता नहीं.

इसका टूटना होता है बहुत अशुभ

नागा साधु इसको लाइफ जैकेट की तरह भी उपयोग करते हैं. इसके जरिये वो आसानी से गहरी नदियों को तैर कर पार कर लेते हैं. वहीं अगर यह पात्र टूट जाए, तो इसे बेहद अशुभ माना जाता है. ऐसे में साधु को भारी प्रायश्चित करना पड़ता है और विधि-विधान से नया पात्र धारण करना होता है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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