सूरजपुर: घर में घुसकर दबंगों का हमला, परिवार से की बेरहमी से मारपीट; मोबाइल छीनकर ‘सबूत’ मिटाने का आरोप

सूरजपुर: जिले के खड़गवा कला गांव में जमीन विवाद ने अचानक ऐसा हिंसक रूप ले लिया कि एक परिवार का आंगन चीखों से गूंज उठा. आरोप है कि कथित दबंगों ने घर में घुसकर पति-पत्नी के साथ बेरहमी से मारपीट की और फिर मोबाइल फोन छीनकर उसे रीसेट कर दिया, ताकि घटना से जुड़े वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिटाए जा सकें. घटना के बाद गांव में दहशत और आक्रोश दोनों का माहौल है.

पीड़िता तारा चक्रधारी, पति वीरेंद्र कुमार ने 23 फरवरी 2026 को पुलिस अधीक्षक, सूरजपुर को लिखित शिकायत देकर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है. शिकायत के अनुसार, 20 फरवरी की शाम लगभग 5:30 बजे अर्जुन, राजकुमार, बुधनी और आशा नामक लोग उनके घर के पास पहुंचे और गाली-गलौज शुरू कर दी. तारा चक्रधारी ने तत्काल खड़गवा चौकी में सूचना दी, लेकिन आरोप है कि न तो शिकायत की पावती दी गई और न ही प्रभावी कार्रवाई हुई.

पीड़िता का कहना है कि अगले ही दिन 21 फरवरी की सुबह करीब 10 बजे वही लोग दोबारा लौटे. इस बार उनके साथ सूर्यबली, रमेश और कौशल्या भी थे. आरोप है कि सभी ने मिलकर घर में घुसकर लाठी-डंडों से हमला कर दिया. तारा चक्रधारी के हाथ, पैर और जांघ में गंभीर चोटें आईं. उनका आरोप है कि हमलावरों ने बाल पकड़कर जमीन पर पटक दिया और कपड़े तक फाड़ दिए. बीच-बचाव करने पहुंचे उनके पति वीरेंद्र कुमार को भी बुरी तरह पीटा गया.

सबसे सनसनीखेज आरोप मोबाइल फोन से जुड़ा है. पीड़िता का कहना है कि मारपीट के दौरान आरोपियों ने उनका मोबाइल छीन लिया और उसे रीसेट कर दिया. मोबाइल में घटना से जुड़े वीडियो फुटेज और अन्य जरूरी दस्तावेज मौजूद थे. उनका दावा है कि यह कदम जानबूझकर साक्ष्य मिटाने की नीयत से उठाया गया.

इधर, सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े कुछ वीडियो वायरल होने की चर्चा है, जिनमें कथित तौर पर मारपीट के दृश्य दिखाई दे रहे हैं. हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहली शिकायत पर ही ठोस कार्रवाई होती तो दोबारा हमला नहीं होता. पीड़ित परिवार का आरोप है कि थाना और चौकी स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद हैं.

अब पूरा मामला पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है. यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह मामला केवल मारपीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि साक्ष्य नष्ट करने और महिला की गरिमा से जुड़े गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा. खड़गवा कला में हर जुबान पर एक ही सवाल है—क्या पीड़ित परिवार को समय रहते न्याय मिल पाएगा?

close