बलरामपुर में अफीम की अवैध खेती का मामला गरमाया, एसपी ने कहा- जांच जारी, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला में शासकीय जमीन पर अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद अब बलरामपुर जिला भी इस गंभीर विवाद की चपेट में आ गया है. जिले के कुसमी विकासखंड के त्रिपुरी गांव में निजी जमीन को लीज पर लेकर प्रदेश से बाहर के लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर अफीम की अवैध खेती किए जाने का मामला सामने आया है, जिससे प्रशासन और राजनीति दोनों में हलचल मच गई है.

मामले के तूल पकड़ने के बाद कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को मौके पर पहुंचा. पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम के नेतृत्व में पहुंची टीम ने पूरे क्षेत्र का निरीक्षण कर प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए. निरीक्षण के दौरान दीपक झा, जशपुर और बलरामपुर जिले के पुलिस अधिकारी, कलेक्टर, डीएफओ और नारकोटिक्स विभाग की टीम भी मौके पर मौजूद रही. इतने बड़े पैमाने पर अफीम की खेती मिलने से प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल उठने लगे हैं.

मीडिया से बातचीत में पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को कभी “धान का कटोरा” कहा जाता था, लेकिन अब जिस तरह से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अफीम की अवैध खेती सामने आ रही है, उससे यह “अफीम का कटोरा” बनने की ओर बढ़ रहा है.

उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी मात्रा में खेती बिना प्रशासनिक लापरवाही के संभव नहीं है. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग करते हुए कहा कि यदि इस नेटवर्क की गहराई से जांच की जाए तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं.

वहीं मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर ने कहा कि अवैध अफीम की खेती के मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है. जांच में जिन भी व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. दुर्ग के बाद अब बलरामपुर में भी बड़े रकबे में अवैध अफीम की खेती मिलने से प्रदेश की राजनीति गरमा गई है.

विपक्ष इसे प्रशासन की बड़ी विफलता बता रहा है, जबकि पूरे मामले की जांच अब प्रशासन और नारकोटिक्स विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है.

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