CG Weather: मौसम का कहर… बलरामपुर-सूरजपुर में भारी ओलावृष्टि, ओलों ने बर्बाद की फसलें; खुले में रखा धान भी हुआ खराब

अंबिकापुर। उत्तरी छत्तीसगढ़ के सरहदी इलाकों में सोमवार की शाम कुदरत का कहर देखने को मिला। बलरामपुर और सूरजपुर जिलों के कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश और भीषण ओलावृष्टि हुई, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
आलम यह था कि सड़क, मैदान और किसानों के खेत ओलों की वजह से सफेद बर्फ की चादर जैसे नजर आने लगे। इस प्राकृतिक बदलाव का सबसे बुरा असर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड की सीमाओं से लगे इलाकों में पड़ा है।
इन इलाकों में बरसे ‘आसमानी पत्थर’
सोमवार शाम करीब चार बजे से मौसम ने करवट ली। वाड्रफनगर, कुसमी, रामचंद्रपुर, सनावल, सामरी और कोरंधा जैसे इलाकों में लगभग एक घंटे तक जमकर बारिश और ओलावृष्टि हुई। वाड्रफनगर विकासखंड में आधे घंटे तक हुई ओलावृष्टि ने सैकड़ों एकड़ में लगी गेहूं, सरसों और सब्जियों की फसलों को मिट्टी में मिला दिया। झारखंड सीमा से लगे कुसमी और कोरंधा में भी गेहूं की खड़ी फसल को व्यापक नुकसान पहुंचा है।
क्यों बदला मौसम का मिजाज?
मौसम विज्ञानी एएम भट्ट के अनुसार, यह स्थिति बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती परिसंचरण और उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के आपस में टकराने के कारण बनी है। विक्षोभ की ठंडी हवा और खाड़ी से आई नमीयुक्त गर्म हवा के मिलन से वातावरण में बड़ा तापांतर पैदा हुआ, जिसके परिणामस्वरूप मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि हुई। संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में भी बादल छाए रहे और हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई।
खुले में रखे धान पर मंडराया संकट
इस बेमौसम आपदा ने केवल खेतों को ही नहीं, बल्कि सरकारी समितियों को भी प्रभावित किया है। वाड्रफनगर, कुसमी और सामरी की समितियों में खुले में रखे धान के बोरों पर ओलों की परत बिछ गई। ओले बोरों की छल्लियों के बीच तक घुस गए हैं, जिससे धान के भीगने और उसकी गुणवत्ता खराब होने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। किसानों और समिति प्रबंधकों के लिए यह दोहरी चिंता का विषय बन गया है।
आगामी 24 घंटों के लिए चेतावनी
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अगले 24 घंटों तक बना रहेगा। इसके कारण बलरामपुर और सूरजपुर के सरहदी इलाकों में फिर से बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है। फिलहाल न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, लेकिन ओलावृष्टि के कारण आने वाले दिनों में उत्तरी छत्तीसगढ़ के तापमान में और अधिक गिरावट आने की संभावना है, जिससे कड़ाके की ठंड की वापसी हो सकती है।

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