छ.ग. विधानसभा: लोकतंत्र के मंदिर में ‘तू-तड़ाक’ का तांडव, जब मर्यादा की दहलीज लांघ गए बिलासपुर के दो ‘शूरवीर’

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार को उस वक्त ‘सियासी अखाड़े’ में तब्दील हो गया, जब विकास की फाइलों से ज्यादा शोर माननीयों के आपसी ‘अहं’ का सुनाई देने लगा. बिलासपुर की माटी से निकले दो दिग्गज- भाजपा के युवा तुर्क सुशांत शुक्ला (बेलतरा) और कांग्रेस के मंझे हुए खिलाड़ी अटल श्रीवास्तव (कोटा) के बीच ऐसी ‘जंग-ए-जुबान’ छिड़ी कि सदन का तापमान अचानक किसी ज्वालामुखी की तरह खौल उठा.
जब ‘तू’ ने लगा दी मर्यादा के महल में आग
सदन की गरिमा उस वक्त तार-तार होने लगी जब चर्चा की शालीनता व्यक्तिगत छींटाकशी की भेंट चढ़ गई. आरोप है कि अटल श्रीवास्तव के लहजे में ‘तू-तड़ाक’ का ऐसा तीखापन घुला कि सुशांत शुक्ला का धैर्य जवाब दे गया. एक पल में सदन ‘माननीय सदस्यों’ की सभा से बदलकर ‘तू-तू, मैं-मैं’ का मंच बन गया. शब्दों के बाण विष बनकर बरसने लगे और मर्यादा का वह बांध टूट गया जिसे लोकतंत्र की बुनियाद माना जाता है.
सभापति का ‘रेड कार्ड’ और 5 मिनट का मौन सन्नाटा
जब मर्यादा का चीरहरण होते देख माहौल बेकाबू होने लगा, तब सभापति धर्मजीत सिंह ने एक सख्त अनुशासक की भूमिका निभाई. उनके चेहरे पर छाई गहरी नाराजगी और आंखों की तल्खी ने बता दिया कि सदन की आसंदी अब खामोश नहीं रहेगी. उन्होंने फौरन ‘ब्रह्मास्त्र’ चलाया और कार्यवाही को 5 मिनट के लिए स्थगित कर दिया—मानो तपते हुए लावे पर बर्फ की सिल्लियां रख दी गई हों. वह 5 मिनट का सन्नाटा माननीयों को यह याद दिलाने के लिए था कि वे जनता के सेवक हैं, न कि किसी गली के पहलवान.
इतिहास के पन्नों से ‘डिलीट’ हुआ अमर्यादित अध्याय
ब्रेक के बाद जब सदन की हलचल दोबारा शुरू हुई, तो सभापति का अंदाज किसी बड़े बुजुर्ग जैसा था. उन्होंने दो टूक शब्दों में नसीहत दी— “मर्यादा में ही इस सदन की शोभा है.” इसके साथ ही उन्होंने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए उस समूचे विवाद और कड़वाहट को सदन के आधिकारिक रिकॉर्ड से विलोपित (Expunged) कर दिया. यानी कागज पर तो वह कड़वाहट मिटा दी गई, लेकिन गूँज अब भी गलियारों में बाकी है.
कलम की एक नोक से उस ‘कलह’ को इतिहास से तो मिटा दिया गया, पर सवाल यही है—क्या रिकॉर्ड से शब्दों का मिट जाना, जनता के मानस पटल पर छपी उस अमर्यादित छवि को भी धो पाएगा? बिलासपुर के इन दो दिग्गजों की भिड़ंत ने यह तो साफ कर दिया कि इस सत्र में अभी और भी ‘मिर्ची’ लगना बाकी है!









