हाईकोर्ट की अवमानना: सोहावल में रात के अंधेरे में धड़ल्ले से चल रही हड्डी फैक्ट्री, सड़ांध और बीमारियों से जनता बेहाल

सोहावल: न्यायपालिका के स्पष्ट आदेशों के बावजूद सोहावल इलाके में नियमों को ताक पर रखकर ‘मेसर्स सोहावल बोन इंडस्ट्रीज’ का संचालन जारी है. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा ताला लगाए जाने और हाईकोर्ट द्वारा बंदी के आदेश के बाद भी फैक्ट्री प्रबंधन रात के अंधेरे में चोरी-छिपे हड्डियों की पिसाई का काम कर रहा है. देवीजी मंदिर और घनी आबादी वाली बस्ती के पास स्थित इस फैक्ट्री से निकलने वाली भयंकर दुर्गंध ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है.

जबलपुर हाईकोर्ट ने 24 अक्टूबर 2024 को एक कड़ा आदेश जारी करते हुए इस फैक्ट्री की समस्त प्रक्रियाओं को तुरंत प्रभाव से बंद करने और वहां संग्रहित हड्डियों को हटाने का निर्देश दिया था. इसके बाद 13 दिसंबर 2024 को फैक्ट्री के प्रोपराइटर मोहम्मद असलम के विरुद्ध भी आदेश पारित किए गए. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कुछ दिन बंद रहने के बाद फैक्ट्री अब फिर से पूरी रात संचालित की जा रही है, जिससे आसपास का वातावरण पूरी तरह प्रदूषित हो गया है.

20 साल पहले खत्म हो चुकी है बोर्ड की सम्मति (Consent)
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिकों की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिकॉर्ड के अनुसार, इस संस्थान की वैधता 30 सितंबर 2004 को ही समाप्त हो चुकी है. पिछले दो दशकों से यह फैक्ट्री बिना बोर्ड की अनुमति और आवश्यक NOC के अवैध रूप से संचालित हो रही है. वर्तमान में भी संस्थान के पास संचालन के लिए कोई वैध सम्मति नहीं है.

पलायन की कगार पर ग्रामीण: “या तो फैक्ट्री हटेगी या हम”
सोहावल की बस्ती में रहने वाले लोगों ने जिला कलेक्टर, एसडीएम और पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि:
बीमारियों का खतरा: हड्डियों की सड़ांध से क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।नियमों का उल्लंघन: नेशनल हाईवे और मंदिर के पास होने के बावजूद पर्यावरणीय नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.

आंदोलन की चेतावनी: परेशान लोगों का कहना है कि यदि फैक्ट्री को कहीं और स्थानांतरित नहीं किया गया, तो वे सामूहिक पलायन करने को मजबूर होंगे.

अधिकारियों का पक्ष
इस मामले में सिटी मजिस्ट्रेट एल.आर. जांगड़े ने जांच के आदेश दिए हैं. वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक गणेश बैगा ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीणों की शिकायतें मिली हैं और जल्द ही स्थल निरीक्षण कर फैक्ट्री संचालक के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी. फिलहाल प्रशासन द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 152 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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