नेताजी की अस्थियां भारत लाने की मांग, बेटी अनीता बोस फाफ पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बोस फाफ ने अपने पिता के कथित पार्थिव अवशेष यानी अस्थियों को जापान के टोक्यो स्थित रेनकोजी मंदिर से भारत लाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस मामले में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय (MEA) और गृह मंत्रालय (MHA) को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने अदालत के सामने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण मामला है, क्योंकि नेताजी की बेटी स्वयं अदालत पहुंची हैं। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि पहले केंद्र सरकार को इस मामले पर अपना जवाब दाखिल करने का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके बाद CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने केंद्र और संबंधित मंत्रालयों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
मार्च में भी उठा था मामला
इससे पहले मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी के भतीजे के बेटे आशीष रे की ओर से दायर PIL पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। अदालत ने उस समय कहा था कि नेताजी की कानूनी वारिस उनकी बेटी अनीता बोस फाफ को स्वयं सामने आकर अपने नाम से याचिका दाखिल करनी चाहिए। अब अनीता बोस फाफ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रेनकोजी मंदिर में रखे नेताजी के कथित अवशेषों को भारत लाने की मांग की है।
‘भारत की धरती पर मिले अंतिम सम्मान’
अनीता बोस फाफ लंबे समय से अपने पिता के अवशेष भारत लाने की मांग करती रही हैं। उनका कहना है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उनकी मातृभूमि की धरती पर अंतिम सम्मान मिलना चाहिए। यह मुद्दा नेताजी की 1945 में हुई कथित विमान दुर्घटना में मृत्यु की घटना से जुड़ा हुआ है।
18 अगस्त 1945 को क्या हुआ था?
प्रचलित जांच निष्कर्षों के अनुसार, 18 अगस्त 1945 को मौजूदा ताइवान में जापानी सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। माना जाता है कि हादसे में नेताजी गंभीर रूप से झुलस गए और जापानी सैन्य अस्पताल में उनकी मृत्यु हुई। सितंबर 1945 से उनके कथित अवशेष टोक्यो के रेनकोजी मंदिर में सुरक्षित रखे होने की बात कही जाती है। हालांकि, नेताजी की मृत्यु को लेकर लंबे समय से विभिन्न दावे और विवाद भी सामने आते रहे हैं।











