दिल्ली में आएगी केरलम वाली फील, रोज जलते हैं हजारों दिए, जान लें कहां है ये जगह

श्री उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर में जाकर न सिर्फ आपको सुकून महसूस होगा बल्कि ऐसा लगेगा कि मानों साउथ इंडिया में आ गए हैं. इस मंदिर की वास्तुकला केरल शैली की है जिसमें ढालदार छते बनी हुई हैं और पूर्व-पश्चिम में दो मुख्य गोपुरम हैं. शाम के समय तो यहां आकर आपको और भी ज्यादा अच्छा लगेगा, क्योंकि मंदिर प्रांगण में हजारों दिए जलाए जाते हैं. पूरा परिसर रोशनी से जगमगा उठता है.
बेहद पुराना है ये मंदिर
जानकारी के मुताबिक, श्री उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर की स्थापना 1983 में कई गई थी. दिल्ली में रहने वाले मलयाली और तमिल समुदायों के लोगों के लिए ये जगह बेहद खास है. उन्हीं के द्वारा पारंपरिक पद्धति से यहां पूजा की जाती है. खास मौकों पर यहां धार्मिक उत्सवों का आयोजन भी किया जाता है.
मंदिर में है गर्भगृह
इस मंदिर में गर्भगृह है जो दो कक्षों में विभाजित किया गया है. इसमें भगवान कृष्ण और मां भगवती की प्रतिमाएं स्थापित हैं. मुख्य कृष्ण मंदिर के अलावा,परिसर में गणपति भगवान, शिव जी की प्रतिमाएं भी हैं. इसके अलावा भगवान अय्यप्पा को समर्पित छोटे मंदिर और नाग देवताओं को समर्पित सर्प कावु की एक प्रतिकृति भी है.
साउथ इंडियन फूड का उठाएं लुत्फ
यहां पर मंदिर के अंदर कैंटीन भी है जहां पर आप में दक्षिण भारतीय फूड का लुत्फ उठा सकते हैं. इस कैंटीन में आपको मसाला डोसा, प्लेन डोसा से लेकर उत्तपम, वड़ा सांभर चटनी, इडली सांभर चटनी, केरल पैरोटा, कॉफी, उल्लीवड़ा, स्वीट बोंडा, परिप्पू वड़ा जैसी पारंपरिक चीजें मिल जाएंगी.यहां के दाम भी किफायती होते हैं.
विजिट का टाइम करें नोट
जानकारी के मुताबिक गर्मियों में ये मंदिर सुबह 4:30 से दिन में 11:00 बजे तक और शाम 6:00 से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है. वहीं सर्दियों में सुबह 5:30 से 11:00 बजे तक और शाम 5:30 से 8:30 बजे तक आप इस मंदिर में विजिट कर सकते हैं.
मंदिर पहुंचने की डिटेल
श्री उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर सहकारिता मार्ग, पॉकेट 3, मयूर विहार फेज 1 नई दिल्ली में पड़ता है. मयूर विहार फेज 1 की मेट्रो ले सकते हैं जो मंदिर से तकरीबन 900 मीटर की दूरी पर पड़ती है.











