दुर्ग विश्वविद्यालय को मिली बड़ी उपलब्धि, डॉ. अंबेडकर चेयर की स्थापना को केंद्र की मंजूरी

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय को केंद्र सरकार से बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि हासिल हुई है। विश्वविद्यालय में डॉ. अंबेडकर चेयर (शोध पीठ) की स्थापना के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही यह छत्तीसगढ़ का पहला विश्वविद्यालय बन गया है, जहां डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों और सामाजिक न्याय से जुड़े विषयों पर विशेष शोध और अध्ययन किया जाएगा।
देश के चुनिंदा संस्थानों में शामिल हुआ विश्वविद्यालय
डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन की ओर से जारी मंजूरी के बाद विश्वविद्यालय देश के उन चुनिंदा शिक्षण संस्थानों की सूची में शामिल हो गया है, जहां यह शोध पीठ स्थापित की जा रही है। इससे पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय और आईआईएम विशाखापट्टनम सहित 24 प्रमुख संस्थानों को यह अवसर मिल चुका है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे प्रदेश में उच्च शिक्षा और सामाजिक अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी।
हर वर्ष मिलेगा 75 लाख रुपए का अनुदान
योजना के तहत विश्वविद्यालय को हर साल 75 लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा 10 लाख रुपए का एकमुश्त स्थापना अनुदान भी मिलेगा। इस राशि का उपयोग शैक्षणिक गतिविधियों, शोध कार्यों, वेतन और अन्य प्रशासनिक जरूरतों के लिए किया जाएगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन की स्थिति में विश्वविद्यालय को अतिरिक्त शोध अनुदान भी प्राप्त हो सकता है।
शोध, अध्ययन और जागरूकता कार्यक्रमों को मिलेगा बढ़ावा
शोध पीठ के तहत एक चेयर प्रोफेसर और एक सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही शोधार्थियों को डॉक्टोरल फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य डॉ. अंबेडकर के सामाजिक न्याय, समान अवसर और समावेशी विकास संबंधी विचारों पर अध्ययन और शोध को प्रोत्साहित करना है। विश्वविद्यालय और डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन के बीच जल्द ही औपचारिक समझौता होने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके बाद शोध पीठ की स्थापना का कार्य शुरू होगा।











